Kuno National Park: मध्यप्रदेश। कूनो नेशनल पार्क में शनिवार को 9 चीते पहुंचे। इनमें 6 मादा और 3 नर हैं। इसके पहले जानकारी सामने आई थी कि, आठ चीते कूनो नेशनल पार्क में आएंगे। चीतों को पहले फ्लाइट से ग्वालियर लाया गया और इसके बाद हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव इन चीतों को विशेष बाड़े में छोड़ा।
VIDEO | Madhya Pradesh: Union Minister Bhupendra Yadav releases cheetahs brought from Botswana at Kuno National Park.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 28, 2026
Nine cheetahs have been brought from Botswana at Kuno National Park (KNP), taking India’s total count of the big cats to 48. The third batch of cheetahs from… pic.twitter.com/JnMmGNiM9E
बताया जा रहा है कि, चीतों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड बनाये गए। पूरा अभियान अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत किया गया। पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे। इस तरह अब भारत में चीतों की संख्या 39 से 48 हो गई है।
VIDEO | Madhya Pradesh: Eight Cheetahs arrive from Botswana to be released at Kuno National Park. The batch from Botswana, comprising six females and two males, were flown to Gwalior on an Indian Air Force aircraft.#kunonationalpark #Cheetah
— Press Trust of India (@PTI_News) February 28, 2026
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सफल प्रजनन के चरण में प्रोजेक्ट चीता
‘प्रोजेक्ट चीता’ अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 वर्तमान में कूनो में पूर्णतः स्थापित और स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं।
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मादा चीता द्वारा दिया जा रहा शावकों को जन्म
भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। ‘गामिनी’ दूसरी बार माँ बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्में 3 सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने 4 नए शावकों को जन्म दिया है। ‘वीरा’ अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है, जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है।
एशिया से लुप्त हो चुके चीतों का मात्र तीन वर्षों में सफल पुनर्स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक सशक्त उदाहरण बन चुका है। प्रजनन करती मादा चीतों, स्वस्थ दूसरी पीढ़ी के शावकों और नए आवासों में विस्तार के साथ यह स्पष्ट है कि चीता अब भारत की वन पारिस्थितिकी का पुनः अभिन्न अंग बन गया है।








