नई दिल्ली: नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने जा रहे आम चुनाव से पहले भारत से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की खतरनाक साजिश रची जा रही है। खुफिया रिपोर्टों और जांच में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI, तुर्किए और बांग्लादेश के साथ मिलकर नेपाल के सीमावर्ती प्रांतों में दंगों और अस्थिरता को हवा दे रही है।
इस खतरे को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की गहन निगरानी कर रही हैं।
विदेशी खुफिया एजेंसियों की सक्रियता और दंगों की जांच
फरवरी 2026 में नेपाल के बीरगंज और रौतहट में हुए भीषण दंगों की जांच के दौरान विदेशी हस्तक्षेप के पुख्ता संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दंगों के पीछे ISI और बांग्लादेशी खुफिया एजेंसी 'एनसएसआइ' (NSI) की सक्रिय भूमिका पाई गई है। परसा जिले के मुख्य जिला अधिकारी भोला दहाल ने भी स्वीकार किया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ना है।
इस्लामिक शक्ति केंद्र के रूप में उभरते सीमावर्ती क्षेत्र
भारत की सीमा से लगे नेपाल के चार प्रमुख प्रदेश-सुदूर पश्चिम, लुंबिनी, मधेश और कोशी-अब 'इस्लामिक शक्ति केंद्र' के रूप में देखे जा रहे हैं। नेपाल की लगभग 97 प्रतिशत मुस्लिम आबादी इन्हीं चार प्रदेशों में निवास करती है, जो भारत के उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और सिक्किम से सीधे जुड़े हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इन क्षेत्रों की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था भारत को सीधे प्रभावित करती है, जिसका फायदा विदेशी एजेंसियां उठाना चाहती हैं।
जाकिर नाइक का नेटवर्क और जनसांख्यिकी बदलाव
भारत-नेपाल संबंधों के विशेषज्ञ यशोदा लाल के अनुसार, बीरगंज और उसके आसपास के इलाकों में विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक का एक मजबूत और सक्रिय नेटवर्क तैयार हो चुका है।
गौर करने वाली बात यह है कि जाकिर नाइक फरवरी 2025 में खुद रौतहट में आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा ले चुका है। इसके साथ ही नेपाल की जनसांख्यिकी में भी बड़ा बदलाव आया है; 2021 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी में 5.09 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सीमावर्ती बांके जिले में मुस्लिम आबादी का अनुपात देश में सर्वाधिक 21.1 प्रतिशत पहुंच गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की डिजिटल निगरानी और SSB की तैनाती
बढ़ते खतरों को देखते हुए आईजी देवीपाटन परिक्षेत्र अमित पाठक ने बताया कि बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती से सटी नेपाल की 243 किलोमीटर लंबी खुली सीमा की सुरक्षा के लिए सशस्त्र सीमा बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल पुलिस के उप महानिरीक्षक दान बहादुर कार्की ने भी पुष्टि की है कि सुरक्षा एजेंसियां अब डिजिटल प्लेटफॉर्मों की निगरानी कर रही हैं ताकि भ्रामक सूचनाओं और दंगों को रोका जा सके। जांच पूरी होने के बाद इस साजिश में शामिल विशिष्ट समूहों और बाहरी प्रभावों के बारे में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।










