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बुरहानपुर के नेहरू मॉन्टेसरी स्कूल की बेदखली पर बड़ा मोड़। हाईकोर्ट में पेश हुए कलेक्टर ने स्वीकार की गलती, कार्रवाई हुई समाप्त। जानिए पूरा घटनाक्रम।

जबलपुर। प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक बड़े शैक्षणिक संस्थान को खाली कराने के आदेश को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। यह मामला करीब 4,500 विद्यार्थियों और लगभग 250 कर्मचारियों वाले नेहरू मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जुड़ा है। प्रशासन द्वारा जारी बेदखली आदेश के खिलाफ स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उनका आरोप था कि न्यायालय की रोक के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट में कलेक्टर की पेशी
इस मामले में बुरहानपुर के कलेक्टर हर्ष सिंह को जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष पेश होकर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आदेश जारी करते समय उनसे अनजाने में त्रुटि हो गई थी। उन्होंने अदालत से बिना किसी शर्त के माफी मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी। कलेक्टर की इस स्वीकारोक्ति और क्षमायाचना के बाद अदालत ने उनके विरुद्ध चल रही अवमानना संबंधी कार्रवाई समाप्त कर दी।

जमीन आवंटन का पुराना विवाद
यह याचिका चिल्ड्रन्स एजुकेशन सोसाइटी और नेहरू मॉन्टेसरी स्कूल की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिस भूमि पर स्कूल संचालित हो रहा है, वह पूर्व में ताप्ती मिल द्वारा शैक्षणिक उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई थी। बाद में मिल के आर्थिक संकट में आने और बीमार उद्योग घोषित होने के पश्चात उसका राष्ट्रीयकरण हुआ और वह केंद्र सरकार के अधीन आ गई। बावजूद इसके, स्कूल उसी परिसर में वर्षों से संचालित होता रहा।

पहले से लगी थी न्यायिक रोक
बताया गया कि ताप्ती मिल के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2024 को रोक लगा दी थी। इसके बावजूद बेदखली से जुड़ा आदेश जारी होने पर विवाद उत्पन्न हुआ। अदालत ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर से जवाब तलब किया था। कलेक्टर द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने और भविष्य में सावधानी बरतने का आश्वासन देने के बाद न्यायालय ने प्रकरण का निपटारा कर दिया। फिलहाल स्कूल की गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेंगी, जिससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों को राहत मिली है।

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