हरियाणा के नूंह जिले की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के दोषी साद उर्फ इक्का को कड़ी सजा सुनाई है। न्यायाधीश डॉ. आशू संजीव तिन्जन की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और साथ ही 70 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
घर में अकेली देख किया था अपहरण
यह शर्मनाक घटना 21 अक्टूबर की रात को घटित हुई थी। पीड़ित नाबालिग लड़की का परिवार उस समय घर पर मौजूद नहीं था, क्योंकि वे मजदूरी के सिलसिले में पंजाब गए हुए थे। इसी का फायदा उठाते हुए फिरोजपुर झिरका के महू गांव निवासी आरोपी साद उर्फ इक्का रात करीब 10 बजे लड़की के घर में घुस गया।
आरोपी ने लड़की का मुंह दबाकर उसे जबरन अगवा कर लिया और पास के जंगल में बने एक सुनसान कोठड़े (कमरे) पर ले गया। वहां आरोपी ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
परिजनों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई
घटना के बाद जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और पीड़ित के बयान दर्ज किए। पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रभावी ढंग से दलीलें और सबूत पेश किए, जिससे आरोपी का दोष सिद्ध हो गया।
विभिन्न धाराओं में सुनाई गई सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी को पोक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई है।
• POCSO एक्ट (धारा 6): 20 साल की सख्त जेल और 50 हजार रुपये का जुर्माना।
• IPC धारा 450 व 366: घर में घुसने और अपहरण के लिए 5-5 साल की सजा और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना।
• IPC धारा 506: डराने-धमकाने के जुर्म में 2 साल की सजा। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, यानी दोषी को कुल मिलाकर 20 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे बिताने होंगे।
जुर्माना न भरने पर बढ़ेगा कैद का समय
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोषी ने जो समय न्यायिक हिरासत में पहले ही बिता लिया है, उसे उसकी कुल सजा की अवधि में से कम कर दिया जाएगा। फैसले के बाद पुलिस ने दोषी को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया है।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि ऐसे कठोर फैसलों से समाज में अपराधियों के बीच डर पैदा होगा और पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।
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