सौम्या यादव - धमतरी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर हलचल तेज हो चुकी है। इसी क्रम में कुरुद के पूर्व विधायक और वरिष्ठ किसान नेता लेखराम साहू ने राजधानी में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भेंट कर अपनी सशक्त दावेदारी प्रस्तुत की है। उनकी सक्रियता ने चुनावी समीकरणों में नई ऊर्जा ला दी है।
राज्यसभा टिकट के लिए औपचारिक दावेदारी
राजधानी में हुई मुलाकात के दौरान साहू ने कांग्रेस नेतृत्व को बताया कि वे वर्षों से किसानों, ग्रामीण विकास और पिछड़ा वर्ग के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। कुरुद क्षेत्र से विधायक रहते हुए उन्होंने कृषि, सिंचाई, सड़क तथा ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार के मुद्दों को प्रमुखता से रखा। एक किसान परिवार से जुड़े होने के कारण वे खेती-किसानी की वास्तविक समस्याओं को करीब से जानते हैं, जिसने उन्हें एक जमीनी, सहज और जनआधारित नेता की पहचान दी है।

2018 के अनुभव और वर्तमान समीकरण
साहू ने बैठक में यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2018 के राज्यसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन्हें आधिकारिक प्रत्याशी बनाया था, लेकिन विधानसभा में संख्या बल अनुकूल न होने के कारण जीत संभव नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि वह परिणाम राजनीतिक अस्वीकृति नहीं, बल्कि स्थिति-आधारित गणित का नतीजा था। उन्होंने इस बार के चुनाव को कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ से अप्रैल 2026 में राज्यसभा की दो सीटें रिक्त हो रही हैं, जो किसान और ग्रामीण समाज को प्रभावी प्रतिनिधित्व देने का उपयुक्त समय है।
किसानों और पिछड़ा वर्ग का समर्थन साहू के पक्ष में
राजधानी में हुई बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसान प्रतिनिधि, पिछड़ा वर्ग के सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। सभी ने एकमत होकर कहा कि, लेखराम साहू का नाम सामाजिक संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से उपयुक्त है। कई उपस्थित नेताओं ने माना कि राष्ट्रीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए अनुभव, समझ और जमीनी पकड़ जैसे गुण साहू में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लेखराम साहू की संगठन के प्रति निष्ठा, वर्षों की सक्रियता और किसानों के बीच मजबूत पकड़ उन्हें 2026 के राज्यसभा चुनाव का एक प्रभावशाली दावेदार बनाती है। अब कांग्रेस के अंतिम निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह चुनाव सामाजिक प्रतिनिधित्व और न्याय की नई दिशा स्थापित करेगा या नहीं।










