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Storyteller Aniruddhacharya: वृदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने पर्सनलिटी राइट्स की रक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका पर सोमवार को अदालत में सुनवाई हुई। पढ़िए पूरी खबर...

Storyteller Aniruddhacharya: दिल्ली हाई कोर्ट ने वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनलिटी राइट्स) की रक्षा के लिए अंतरिम राहत दे दी। साथ ही कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में उन्हें सलाह दी कि एक धार्मिक गुरु को आलोचना, प्रशंसा या अपनी पहचान से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए। जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने कहा कि आपको इन सबसे ऊपर होना चाहिए, क्योंकि आप खुद लोगों को यही सिखाते हैं।

कोर्ट ने आदि शंकराचार्य का उदाहरण दिया। न्यायाधीश ने बताया कि शंकराचार्य ने कभी अपने आलोचकों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं किया। वे असहमति रखने वालों से तर्क के जरिए बहस करते थे और अपनी बात साबित करते थे। कोर्ट का कहना था कि जब कोई व्यक्ति अपने विचार या दर्शन लोगों के सामने रखता है तो कुछ लोग उनसे सहमत नहीं होते। लोगों को असहमति जताने और सवाल उठाने का अधिकार है। कोर्ट ने जोर दिया कि सिर्फ असहमति को मानहानि नहीं माना जा सकता, जब तक कोई बात वाकई नुकसान पहुंचाने वाली न हो। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि अनिरुद्धाचार्य वृंदावन के रहने वाले हैं, फिर उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया। जस्टिस गेड़ेला ने कहा कि इंटरनेट की चीजें पूरे विश्व में दिखती हैं, चाहे मंगल ग्रह या बृहस्पति पर क्यों न हों। देश में कलकत्ता, इलाहाबाद या लखनऊ जैसी अन्य अदालतें भी हैं। अगर वे आदेश पास करेंगी तो क्या गूगल उन्हें नहीं मानेगा? कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली से आपका इतना प्रेम क्यों है।

अनिरुद्धाचार्य महाराज के वकील ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर उनके नाम और वीडियो का गलत इस्तेमाल हो रहा है। एआई और डीपफेक से बने कंटेंट को ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे वे खुद बोल रहे हों। इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है और लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेंगे। गूगल की तरफ से बताया गया कि यूट्यूब पर एआई जनरेटेड या गलत कंटेंट को हटाया जा सकता है। कुछ लिंक्स फैन पेज के वीडियो थे, जिनमें उनके पुराने बयानों पर आलोचना हो रही थी, खासकर महिलाओं और विज्ञान से जुड़ी टिप्पणियों पर। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों का विश्वास झूठी चीजों से हिल जाता है तो इसका मतलब उनका विश्वास कमजोर है। बहरहाल, हाई कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य को राहत देते हुए उन शिकायती वीडियो और लिंक्स को यूट्यूब से हटाने का अंतरिम आदेश दिया। 

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