Delhi Jal Board: दिल्लीवासियों को अब पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि राजधानी में लोगों को 24 घंटे पानी की सप्लाई होगी। इसे लेकर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेट रेवेन्यू वॉटर (NRW) सप्लाई का स्टडी प्लान तैयार किया है। जिसके तहत राजधानी के करीब 66.8% हिस्से का विश्लेषण किया जाएगा, जिसमें कच्चे जल स्रोतों और आवंटन होगा।
ऐसा भी कहा जा रहा है कि दिल्ली जल बोर्ड के जिन 9 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों से पानी की सप्लाई की जाती है, उनकी एक इन्वेंट्री भी तैयार की जाएगी। सप्लाई होती है, उनकी एक इन्वेंट्री भी तैयार की जाएगी। ताकि पता लग सके कि प्लांटों की वास्तविक ट्रीटमेंट कैपेसिटी कितनी है, इसके अलावा फ्यूचर में जनसंख्या बढ़ने के बाद दिल्ली में कुल कितने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने होंगे।
दिल्ली को 6 जोन में बांटा
स्टडी के लिए दिल्ली को 6 जोन में बांटा गया है, जिसमें कुल 19.71 लाख उपभोक्ता हैं और दायरा 992 वर्ग किमी है। दिल्ली जल बोर्ड कुल 1483 वर्ग किमी दायरे में पानी सप्लाई करता है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि दिल्ली में वॉटर सप्लाई पूरी तरह से 2 राज्यों से मिलने वाले कच्चे पानी पर डिपेंड है।
हरियाणा- यूपी से कितना पानी मिलता है ?
हरियाणा से 929 एमजीडी और उत्तर प्रदेश के अपर गंगा कैनाल से गंगाजल 253 एमजीडी मिलता है। दोनों राज्यों को मिलाकर कुल 1182 एमजीडी पानी मिलता है। वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी पहुंचते-पहुंचते 863 एमजीडी ही रह जाता है। यानी जितना पानी दोनों राज्यों से मिलता है, उसका 26-27% लॉस हो जाता है।
वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर स्टडी प्लान
कच्चे पानी को ट्रीट कर जल बोर्ड कुल 865 एमजीडी पानी सप्लाई करता है, जिसमें से आगे करीब 45 प्रतिशत पानी का नुकसान हो जाता है। नुकसान के कई कारण हैं, इस समस्या को सुलझाने और भविष्य में बढ़ी हुई आबादी को भरपूर पानी देने के लिए ही जल बोर्ड ने वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टडी प्लान तैयार किया है। इसके तहत DJB अपने 9 सप्लाई जोन में से 6 जोन में स्टडी कराएगा, जो कुल जोन का 66.8 प्रतिशत हिस्सा है।
चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से सप्लाई अधूरी
चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की सप्लाई को शुरू कर दिया है, लेकिन पूरी तरह नहीं। 58 एमजीडी पानी उत्पादन करने वाले प्लांट के दूसरे यूनिट में पानी को पंप करने के लिए कई मोटर्स लगे हैं, जो 91 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
मोटर्स ठीक हो जाने के बावजूद नमी की वजह से बार-बार खराब हो रहे हैं, जिसके चलते पानी सप्लाई 100 प्रतिशत नहीं हो पा रही है। जल बोर्ड के अफसरों का कहना है कि चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी उत्पादन के लिए 2 यूनिट हैं। इसमें एक यूनिट तो चल रहा है।
पंपिंग मोटर्स में खराबी
दूसरे यूनिट से 58 एमजीडी पानी उत्पादन होता है, लेकिन इस यूनिट के पंपिंग मोटर्स ही बार-बार ट्रिप कर रहे हैं, जिससे सप्लाई 100 प्रतिशत नहीं हो पा रही है। मोटर्स 6.6 केवी रेटिंग के हैं, जिनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से नहीं मिल पाते हैं। भारी क्षमता वाले इन मोटर्स के रख-रखाव में काफी समय लगता है। जिन इलाकों में पानी की दिक्कत है, उन इलाकों में कुल 145 टैंकर्स की व्यवस्था की गई है।










