हरियाणा राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के भीतर मची उठापटक अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बागी सुरों को शांत करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए सोमवार को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में पार्टी के अनुशासन और बागियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर गहन मंथन किया जा रहा है।
बैठक से विनेश फोगाट समेत दो विधायक नदारद
इस अहम बैठक में हरियाणा कांग्रेस के कुल 32 विधायकों में से अब तक 30 विधायक ही शामिल हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि क्रॉस वोटिंग के आरोपी पांच विधायकों को इस बैठक का न्योता ही नहीं दिया गया, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी उन्हें फिलहाल मुख्यधारा से अलग रख रही है। वहीं, जुलाना से विधायक विनेश फोगाट और पूजा चौधरी भी अभी तक बैठक में नहीं पहुंची हैं, जिनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। बैठक में नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद कर्मवीर बौद्ध भी मौजूद हैं।
कार्यवाही को लेकर दो गुटों में बंटी कांग्रेस
बैठक शुरू होने से पहले ही विधायकों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। पार्टी के भीतर दो स्पष्ट धड़े नजर आ रहे हैं। एक गुट का मानना है कि पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों विधायकों पर तुरंत और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, दूसरा गुट थोड़ा नरम रुख अपनाते हुए मांग कर रहा है कि केवल इन पांच पर ही नहीं, बल्कि उन चार अन्य विधायकों के नाम भी सार्वजनिक किए जाएं जिनके वोट तकनीकी कारणों से रद्द हुए थे।
तीन विधायकों का जवाब, दो ने दिखाए बगावती तेवर
कांग्रेस की अनुशासन समिति ने क्रॉस वोटिंग के संदेह में पांच विधायकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। इनमें से नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी, साढ़ौरा विधायक रेनू बाला और रतिया से विधायक जरनैल सिंह ने अपना स्पष्टीकरण भेज दिया है। तीनों ने दावा किया है कि उन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को ही वोट दिया था। हालांकि, पार्टी सूत्र बताते हैं कि आलाकमान उनके जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। दूसरी ओर, पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने नोटिस का कोई जवाब न देकर सीधे तौर पर बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
इस्तीफे की सुगबुगाहट और उपचुनाव की संभावना
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास जल्द ही अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि ये विधायक अपने करीबियों के लिए सीटें खाली कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो प्रदेश में एक बार फिर उपचुनावों की आहट सुनाई देगी। कांग्रेस इन सीटों पर नए चेहरों को उतारकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहेगी, वहीं भाजपा भी मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सेंध लगाने की पूरी कोशिश करेगी।
अनुशासन समिति की रिपोर्ट और सदस्यता पर खतरा
अनुशासन कार्यवाही समिति ने 28 मार्च को अपनी गोपनीय रिपोर्ट दिल्ली हाईकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि नोटिस का जवाब न देना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। समिति ने सभी तथ्यों के आधार पर इन विधायकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की है।
यदि पार्टी इन पांचों विधायकों को निष्कासित करती है, तो उनके पास विकल्प बेहद सीमित होंगे। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के चलते उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी तलवार लटक सकती है। वे या तो निर्दलीय के रूप में सदन में रहेंगे या किसी अन्य दल का दामन थामेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी विधायकी दांव पर लगानी पड़ सकती है। फिलहाल, सबकी नजरें दिल्ली में चल रही इस बैठक के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
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