नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को नए PMO कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन 1 व 2 का उद्घाटन किया। 1947 से साउथ ब्लॉक में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय अब आधिकारिक रूप से नई इमारत में स्थानांतरित हो गया है। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक ब्रिटिश शासन की प्रतीक इमारतें थीं, जो गुलामी की मानसिकता को दर्शाती थीं। उन्होंने कहा कि अब देश को उस सोच से पूरी तरह बाहर निकलना जरूरी है।
PM का संदेश: ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा- दिल्ली की कई इमारतों में आज भी औपनिवेशिक सोच के निशान मौजूद हैं, जबकि आजाद भारत में शहीदों के लिए राष्ट्रीय स्मारक तक नहीं था।
2014 के बाद देश ने गुलामी के प्रतीकों से दूरी बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की सोच सिर्फ योजनाओं में नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और सरकारी भवनों में भी दिखनी चाहिए।
क्यों जरूरी था नया PMO?
प्रधानमंत्री ने पुरानी इमारतों को लेकर कई अहम बातें कहीं-
- 100 साल पुरानी इमारतें जर्जर हो चुकी थीं।
- नई तकनीक और आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के लिए अनुपयुक्त थीं।
- कई मंत्रालय 50 अलग-अलग इमारतों में फैले हुए थे।
- इससे हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये किराए में खर्च होते थे।
सरकार का दावा है कि सभी मंत्रालयों को एकीकृत परिसर में लाने से समय, धन और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा।
‘सेवा तीर्थ’ का अर्थ क्या?
नई इमारत की पट्टिका पर ‘सेवा तीर्थ’ के नीचे लिखा है- ‘नागरिक देवो भव’।
सरकार के अनुसार, इसका मतलब है कि शासन व्यवस्था नागरिकों को सर्वोपरि मानकर काम करेगी।
अब ‘सेवा तीर्थ’ में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे। वहीं कर्तव्य भवन 1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित कई बड़े मंत्रालय स्थानांतरित किए जाएंगे।
नए ऑफिस से बड़े फैसले
उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नई इमारत में कई महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर किए।
- PM राहत योजना: सड़क हादसे के पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज
- लखपति दीदी योजना: लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़
- कृषि अवसंरचना कोष: 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये
- स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0: 10,000 करोड़ रुपये की मंजूरी
सेंट्रल विस्टा का बड़ा चरण
यह पूरा बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। सरकार इसे आधुनिक, कुशल और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है।
करीब 78 वर्षों तक साउथ ब्लॉक सत्ता का केंद्र रहा। अब प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता ‘सेवा तीर्थ’ होगा, जिसे सरकार ‘नए भारत की प्रशासनिक पहचान’ के रूप में पेश कर रही है।
साउथ ब्लॉक में आखिरी बैठक
इस उद्घाटन से पहले आज सुबह साउथ ब्लॉक स्थित पुराने प्रधानमंत्री कार्यालय में कैबिनेट की आखिरी बैठक हुई। 80 सालों तक देश की दिशा तय करने वाले इस ऐतिहासिक भवन ने आज अपनी आखिरी विदाई ली। 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक से लेकर आज पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली आखिरी बैठक तक, यह भवन भारतीय लोकतंत्र के गौरव का साक्षी रहा है। अब पुराने दफ्तर को 'युगे युगीन भारत' संग्रहालय में बदला जाएगा।
#WATCH | Delhi: PM Narendra Modi unveils the name of complex housing PMO, NSCS and Cabinet Secretariat- ‘Seva Teerth’
— ANI (@ANI) February 13, 2026
Since 2014, the Modi government has taken steady steps to move away from symbols of India’s colonial past and to usher in a mindset shift.
The following are… pic.twitter.com/6UYEWa3zf2
1,189 करोड़ की लागत और भव्य विस्तार
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत निर्मित इस नए परिसर को बनाने में 1,189 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 2.26 लाख वर्ग फुट में फैले इस 'सेवा तीर्थ' को तीन मुख्य इमारतों में बांटा गया है:
- सेवा तीर्थ 1: प्रधानमंत्री का आधिकारिक कार्यालय।
- सेवा तीर्थ 2: कैबिनेट सचिवालय, जहाँ अब कैबिनेट की बैठकें होंगी।
- सेवा तीर्थ 3: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का दफ्तर।
इन सभी महत्वपूर्ण कार्यालयों के एक साथ आने से सरकार की रणनीतिक और प्रशासनिक गति में बड़ा इजाफा होगा।
पूरी तरह हाईटेक और पेपरलेस 'सेवा तीर्थ'
'सेवा तीर्थ' को भविष्य की जरूरतों के अनुसार 'स्मार्ट' बनाया गया है। यहाँ की प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:
- डिजिटल आर्किटेक्चर: यहां पेपरलेस वर्क कल्चर को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स बनाए गए हैं।
- स्मार्ट सुरक्षा: परिसर में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, हाई-टेक मॉनिटरिंग नेटवर्क और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम दिया गया है।
- बेहतर कनेक्टिविटी: प्रधानमंत्री के मूवमेंट के दौरान विजय चौक और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक बाधित न हो, इसके लिए विशेष कॉरिडोर और अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी का ध्यान रखा गया है।
आम जनता के लिए राहत
'सेवा तीर्थ' को विजय चौक के पास बसाने का एक बड़ा उद्देश्य प्रधानमंत्री के काफिले के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम से जनता को मुक्ति दिलाना है। साथ ही, यहाँ 'कर्तव्य भवन' के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों को एक ही जगह लाकर आम नागरिकों के लिए सरकारी दफ्तरों तक पहुंच को सुगम और पारदर्शी बनाया गया है।









