मध्यप्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला विवाद में अब बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। 2 अप्रैल को हाई कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला का अचानक भोजशाला पहुंचकर निरीक्षण करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच करीब एक घंटे तक चले इस निरीक्षण में जज ने परिसर की संरचना, स्तंभ और ASI सर्वे से जुड़े अहम तथ्यों को करीब से समझा। ऐसे में अब सभी की नजरें 2 अप्रैल पर टिक गई हैं, जब यह मामला निर्णायक दिशा ले सकता है।
भोजशाला में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बताया जा रहा है कि, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने भोजशाला का विस्तृत निरिक्षण किया है। 1 बजकर 52 मिनट पर जस्टिस शुक्ला भोजशाला में दाखिल हुए थे। इस दौरान भोजशाला के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई से पहले जज का भोजशाला निरिक्षण काफी अहम माना जा रहा है।
वास्तुकला, स्तम्भ और संरचना की ली जानकारी
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने भोजशाला की वास्तुकला, स्तम्भ और संरचना को करीब से देखा। उन्होंने इसके बारे में अधिकारियों से जानकारी भी ली। अधिकारियों ने उन्हें भोजशाला में किए गए ASI सर्वे और अन्य तथ्यों से अवगत करवाया।
हाई कोर्ट के सामने पेश सर्वे रिपोर्ट
ASI द्वारा भोजशाला में 98 दिन तक सर्वेक्षण कार्य किया गया था। इसके बाद तैयार सर्वे रिपोर्ट एएसआई ने हाई कोर्ट के सामने पेश की। इस रिपोर्ट की प्रतियां पक्षकारों को दी गई है। 16 मार्च को सुनवाई के दौरान जज ने भोजशाला निरिक्षण की बात कही थी।
मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि, भोजशाला असल में कलम मौला मस्जिद है जबकि हिन्दू पक्षकार इसे राजा भोज द्वारा स्थापित वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं। भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग पर एएसआई ने यहां सर्वेक्षण किया था। अब 2 अप्रैल को मामले में निर्णायक मोड़ आ सकता है।










