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भोपाल के बावड़िया ओवरब्रिज निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर तीन वरिष्ठ पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर आरोप लगे हैं। मामला EOW और लोकायुक्त तक पहुंच चुका है। विधानसभा में भी मुद्दा उठने के बाद जांच प्रक्रिया तेज हो गई है।

भोपाल। स्थानीय बावड़िया क्षेत्र में निर्मित ओवरब्रिज अब निर्माण कार्य से अधिक कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस परियोजना को लेकर लोक निर्माण विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसके बाद मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ चुका है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए शिकायतें आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और लोकायुक्त संगठन तक पहुंच गई हैं। जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं उनमें पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता आर.के. मेहरा, अधीक्षण यंत्री एम.के. दुबे और कार्यपालन यंत्री एम.पी. सिंह शामिल हैं। 

सरकार ने विधानसभा  बताया जांच हो रही 
विधानसभा में जब इस मुद्दे को उठाया गया तो सरकार ने स्वीकार किया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं और जांच प्रक्रिया जारी है। जानकारी के अनुसार, मुख्य अभियंता आर.के. मेहरा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप पहले भी लगाया जा चुका है। वर्ष 2012 में इस संबंध में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज हुई थी, जो अब तक सत्यापन स्तर पर बताई जा रही है। इसके अलावा मार्च 2023 में उनके विरुद्ध एक और शिकायत दर्ज की गई, जिसकी जांच अभी चल रही है। इसी तरह अधीक्षण यंत्री एम.के. दुबे और कार्यपालन यंत्री एम.पी. सिंह के खिलाफ भी 29 मार्च 2023 को शिकायतें दर्ज हुईं। 

इनके खिलाफ लोकायुक्त के यहां भी शिकायतें
एम.पी. सिंह के विरुद्ध अक्टूबर 2023 में दर्ज एक अन्य शिकायत में बावड़िया ओवरब्रिज सहित अन्य पुल निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और कंसल्टेंसी परियोजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने जून 2024 में अपराध पंजीबद्ध कर लिया, जिससे स्पष्ट हो गया कि जांच एजेंसी को प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं और मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं है। इन अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में भी अलग-अलग समय पर शिकायतें की गई हैं। कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। 

आरोपों को गंभीरता से ले रही हैं जांच एजेंसियां
एक प्रकरण में लोकायुक्त ने मामला आगे की कार्रवाई के लिए ईओडब्ल्यू को भेजा है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां आरोपों को गंभीरता से ले रही हैं और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। परियोजना की गुणवत्ता, लागत में वृद्धि और निर्माण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और परियोजना की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ाई गई। तकनीकी स्वीकृतियों और कंसल्टेंसी अनुबंधों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। 

आरोप सही निकले तो होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। कुल मिलाकर बावड़िया ओवरब्रिज परियोजना अब विकास कार्य से अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता का मुद्दा बन गई है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, लेकिन फिलहाल यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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