रायपुर। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का नौवां दीक्षांत समारोह 22 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे तथा दीक्षांत भाषण देंगे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के मुख्य अतिथि होने के कारण विवि प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। समारोह में प्रवेश केवल आमंत्रण के आधार पर होगा। इस बार भी एचएनएलयू का दीक्षांत विवि परिसर में आयोजित ना होकर बीते सत्रों की तरह वीपीआई रोड स्थित एक निजी होटल में रखा गया है।
दीक्षांत समारोह का प्रसारण विश्वविद्यालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। सीजेआई के अलावा छग उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं विवि के कुलाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश व विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य पीएस नरसिम्हा तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
विवि में अब रिसर्च हब एंड स्पोक ब्लॉक
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 36 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। इनमें कुलाधिपति स्वर्ण पदक, सर्वश्रेष्ठ उत्तीर्ण विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद स्वर्ण पदक तथा विभिन्न स्मृति स्वर्ण पदक शामिल हैं। 6 शोधार्थियों को पीएचडी प्रदान की जाएगी। मास्टर ऑफ लॉ करने वाले 88 छात्रों को स्नातकोत्तर उपाधि तथा 148 विद्यार्थियों को विधि स्नातक की उपाधि प्रदान की जाएगी। दीक्षांत समारोह से पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले नए सभागार परिसर का शिलान्यास भारत के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। इसके अलावा नवस्थापित 'रिसर्च हब एंड स्पोक' ब्लॉक का उद्घाटन भी होगा। इसमें 30 अनुसंधान कक्ष एवं एक बोर्ड कक्ष शामिल है।
अबूझमाड़िया समुदाय पर शोध
शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में दीक्षांत समारोह में चर्चा के अलावा विवि प्रबंधन ने बीते सत्र में हासिल उपलब्धियों पर भी बात की। कुलपति डॉ. वीसी विवेकानंदन ने बताया, हेल्थ शील्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संकाय एवं कर्मचारियों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति सीमा 9,000 रुपए से बढ़ाकर 30,000 रुपए की गई है। एक करोड़ रुपए की निधि के साथ 'स्टाफ करुणा कोष नीति' प्रारंभ की गई है। शोध क्षेत्र में विश्वविद्यालय को जलवायु परिवर्तन संबंधी विधायी अध्ययन परियोजना तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा 'अबूझमाड़िया समुदाय' पर एक प्रमुख शोध परियोजना स्वीकृत हुई है। 'प्रोजेक्ट जस्टिस कनेक्ट' के लिए 3.35 करोड़ रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ है।









