Logo
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में दावा किया कि सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित किए जा चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों को कोई सूचना ना मिलने से असमंजस बढ़ गया है।

पंकज गुप्ते - बिलासपुर। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। हाईकोर्ट के आदेश का पालन न किए जाने पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई 16 फरवरी को हुई, जिसमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने शपथपत्र देकर दावा किया कि सभी कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया गया है। हालांकि, कर्मचारियों को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई, जिससे भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अवमानना याचिका पर सुनवाई
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने हलफनामा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित किए जा चुके हैं नियमितीकरण से जुड़े आदेश पत्र भी अदालत में जमा कर दिए गए हैं, लेकिन याचिकाकर्ता कर्मचारियों को न तो कोई आदेश मिला, न ही कोई आधिकारिक सूचना। इसी कारण कर्मचारी यूनिवर्सिटी के दावे पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।

24 अप्रैल तक जवाब और लाभ सुनिश्चित करने के मिले निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल यूनिवर्सिटी को 24 अप्रैल तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने, और कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस रुख से कर्मचारियों में उम्मीद तो जगी है, लेकिन यूनिवर्सिटी की चुप्पी उन्हें उलझन में डाल रही है।

2008 से लेकर अब तक संघर्ष की लंबी कहानी
इस विवाद की जड़ वर्ष 2008 के आदेश से जुड़ी है, जब तत्कालीन कुलपति प्रो. एल.एम. मालवीय ने राज्य शासन के निर्देश पर तृतीय और चतुर्थ वर्ग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश जारी किया था। 

लेकिन 2009 में विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद प्रबंधन ने पुराने आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना हक पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी, जहाँ अदालतों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया। फिर भी यूनिवर्सिटी ने आदेशों का पालन नहीं किया, जिससे वर्तमान अवमानना याचिका दायर की गई।

अब सबकी नजर 24 अप्रैल की सुनवाई पर
कर्मचारी लगातार पूछ रहे हैं 'यदि नियमित कर दिया गया है, तो हमें सूचना क्यों नहीं?' अब 24 अप्रैल की अगली सुनवाई में सेंट्रल यूनिवर्सिटी क्या तर्क पेश करती है और हाईकोर्ट आगे क्या सख्त कदम उठाएगा इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

5379487