Logo
बलौदाबाजार जिले में सामान्य सभा की पांचवीं बैठक में विभागीय अधिकारियों की गैरहाजिरी पर भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों ने जमकर हमला बोला।

कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले की राजनीति इन दिनों उबाल पर है। हालात ऐसे हैं कि, सत्ताधारी दल के अपने ही चुने हुए जनप्रतिनिधि अब खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। ताजा बवाल जिला पंचायत बलौदाबाजार-भाटापारा की सामान्य सभा की पांचवीं बैठक में देखने को मिला, जहां सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ही सिस्टम की पोल खोल दी।

बैठक में भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों ने विभागीय अधिकारियों की गैरहाजिरी पर जमकर हमला बोला। सदस्यों का साफ कहना है कि, साल 2026 में अब तक सिर्फ पांच बैठकें हुईं और उन बैठकों में भी जिम्मेदार अधिकारी नदारद रहे। जब अधिकारी ही मौजूद नहीं रहेंगे, तो विभागीय कामकाज की समीक्षा कैसे होगी? जनता के मुद्दे कैसे उठेंगे? यह सीधा-सीधा जनप्रतिनिधियों का अपमान है।

qबाकी क्षेत्रों को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली
सबसे बड़ा आरोप 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर लगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों के सदस्यों ने एक सुर में कहा कि 15वें वित्त की रकम का खुला ‘बंदरबांट’ किया गया। आरोप है कि, कुछ चुनिंदा सदस्यों के क्षेत्रों में ही विकास कार्यों की झड़ी लगा दी गई, जबकि बाकी क्षेत्रों को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। बिना पूर्ण अनुमोदन, बिना सभी सदस्यों की सहमति, चुपचाप राशि खर्च कर दी गई। यह सवाल अब खुलेआम उठने लगे हैं।

wजिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई
मामला यहीं नहीं रुका, आधा दर्जन से ज्यादा भाजपा और कांग्रेस सदस्यों ने कलेक्टर दीपक सोनी को लिखित शिकायत सौंप दी है। साफ शब्दों में जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि, क्या प्रशासन इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच करेगा या फिर फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा? होली के रंगों के बीच उठी यह सियासी चिंगारी अगर भड़की, तो उसके छींटे सत्ता के गलियारों तक जरूर जाएंगे। अपने ही जनप्रतिनिधियों की नाराजगी ने साफ कर दिया है कि, अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है।

5379487