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बिहार के छपरा में रामनवमी के दिन बड़ा हादसा हुआ, जहां एक भाई को बचाने में दो बहनें भी डूब गईं। तीनों बच्चों की मौत से गांव में मातम पसरा है।

Chapra News: रामनवमी के अवसर पर जहां देशभर में श्रद्धा और उल्लास का माहौल है, वहीं बिहार के सारण जिले से एक हृदयविदारक हादसे की खबर सामने आई है। शुक्रवार सुबह छपरा में तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में मातम छा गया।

यह घटना मांझी थाना क्षेत्र के मटियार गांव की है। बताया जा रहा है कि घाघरा नदी से कटकर बने एक छाड़न (पानी से भरे गड्ढे) में यह हादसा हुआ। रोज की तरह गांव के कुछ लोग नदी पार जलावन के लिए लकड़ी काटने गए थे, उसी दौरान यह दर्दनाक घटना घटी।

भाई को बचाने में डूबीं दोनों बहनें
स्थानीय लोगों के अनुसार, मटियार निवासी पप्पू महतो का 10 वर्षीय पुत्र गुंजन कुमार पानी पीने के लिए छाड़न के किनारे पहुंचा। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। गुंजन को डूबता देख उसकी 12 वर्षीय बहन रजनी कुमारी उसे बचाने के लिए दौड़ी, लेकिन वह भी संतुलन खो बैठी और पानी में गिर गई। दोनों को बचाने के प्रयास में उनकी मौसी की बेटी, पैगम्बरपुर निवासी कृष्णा महतो की 13 वर्षीय पुत्री प्रियांशू कुमारी भी पानी में उतर गई। दुर्भाग्यवश, वह भी डूब गई। इस तरह एक के बाद एक तीनों बच्चों की मौत हो गई।

घटना के समय मौके पर मौजूद दो अन्य किशोरों ने भी बच्चों को बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। हालांकि, वे किसी तरह खुद को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रहे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों के शव पानी से बाहर निकाले गए।

पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी। साथ ही अंचलाधिकारी को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांव में मातम
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसे खतरनाक छाड़नों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।

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