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पेट्रोल-डीजल ड्यूटी कट से सरकार को हर 15 दिन में 5500 करोड़ का नुकसान। विंडफॉल टैक्स से कुछ भरपाई होगा लेकिन बड़ा राजस्व झटका तय है।

नई दिल्ली. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद केंद्र सरकार को राजस्व में बड़ा झटका लगने वाला। सरकार को हर 15 दिन में करीब 5500 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ेगा। यह जानकारी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने दी।

सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले से हर पखवाड़े करीब 7000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। हालांकि, सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाकर कुछ नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की है, जिससे करीब 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हर 15 दिन में होने का अनुमान है। इस तरह कुल मिलाकर नेट नुकसान 5500 करोड़ रुपये बैठता है।

टैक्स बदलावों से 1 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता
अगर यही व्यवस्था पूरे वित्त वर्ष 2026-27 तक जारी रहती है, तो सालाना आधार पर सरकार को करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये का राजस्व झटका लग सकता। पहले ही अनुमान लगाया जा चुका है कि इन टैक्स बदलावों से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो सकता।

मिडिल ईस्ट संकट के कारण घटी एक्साइज ड्यूटी
सरकार ने यह कदम मिडिल ईस्ट संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए उठाया। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई। इसके चलते पेट्रोल और डीजल पर अंडर-रिकवरी बढ़ गई है। 

पेट्रोल पर करीब 26 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपये प्रति लीटर का घाटा बताया गया। कुल मिलाकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रोजाना करीब 2400 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही।

इसी को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। तेल मंत्रालय के मुताबिक, एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं दिया जा रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए किया जा रहा है, ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे।

साथ ही, सरकार ने 27 मार्च से डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और जेट फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए निर्यात न बढ़ाएं।

सरकार का कहना है कि वह हर 15 दिन में कच्चे तेल के आयात और बाजार के हालात की समीक्षा करेगी और उसी के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।

(प्रियंका कुमारी)

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