Stock Market: भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को कमजोरी के साथ लुढ़क गया। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक गिरकर 81629.80 पर कारोबार कर रहा था और निफ्टी-50 भी एक समय 25273 के नीचे रह गया, जो निवेशकों के बीच तनाव और नकारात्मक भावना को दिखा रहा। बाजार में 1370 शेयर चढ़े जबकि 2202 शेयर गिरावट में और 157 शेयरों की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ।
इस गिरावट का असर सिर्फ प्रमुख सूचकांकों पर नहीं दिखा बल्कि सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान पर रहे। बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी और फार्मा शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। वहीं आईटी सेक्टर को कुछ मजबूती मिली और उसकी शेयरों में 1.9 प्रतिशत तक का उछाल नजर आया लेकिन यह समग्र बाजार भावना को बदलने के लिए काफी नहीं रहा।
कमजोर वैश्विक संकेत से बाजार पर दबाव बढ़ा
एक अहम वजह कमजोर वैश्विक संकेत हैं। एशियाई बाजारों में निक्केई 225 और कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट में रहे। वहीं वॉल स्ट्रीट पर तकनीकी शेयरों के दबाव से भी जोखिम की भावना बढ़ी। खासकर एनवीडियो के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट से तकनीकी और सेमीकंडक्टर शेयरों पर नकारात्मक असर दिखा।
एफआईआई की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार को कमजोर किया। पिछले सत्र में एफआईआई ने करीब 3465.99 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा और बाहर जाने वाली पूंजी से बाजार की भावना प्रभावित हुई। घरेलू संस्थागत निवेशक हालांकि कुछ राहत देने वाले रहे लेकिन इसका असर सीमित रहा।
कमजोर रुपये से भी सेंटीमेंट बिगड़ा
मध्य पूर्व की स्थिति भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता बेनतीजा रहने से संभावित तनाव की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशक सतर्क रहे। इसी के साथ रुपए भी कमजोर होकर 90.95 प्रति डॉलर पर खुला, जिससे बाजार को और दबाव मिला।
मूल्य अस्थिरता को मापने वाला इंडिया विक्स भी लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 13.44 पर पहुंच गया, जो अक्टूबर में निवेशकों की बेचैनी और सतर्कता का संकेत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जहां बाजार में तेजी के कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहे हैं, वहीं इस साइडवेज मूवमेंट और कमजोर वैश्विक वातावरण के बीच निवेशक चुनिंदा और सावधान ट्रेडिंग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर बाजार का यह दबाव घरेलू और वैश्विक कारकों के मिश्रण का नतीजा है, जिसमें विदेशी बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत, भूराजनीतिक तनाव और रुपए की कमजोरी शामिल हैं।
(प्रियंका कुमारी)










