Credit Score: अक्सर लोगों को लगता है कि क्रेडिट कार्ड की परेशानी तभी शुरू होती है जब किस्त या बिल लेट हो जाए। लेकिन सच इससे थोड़ा अलग है। आप हर महीने समय पर पूरा भुगतान कर रहे हों, फिर भी आपका क्रेडिट स्कोर गिर सकता। वजह है-क्रेडिट यूटिलाइजेशन।
क्या होता है क्रेडिट यूटिलाइजेशन?
सीधी भाषा में समझें तो क्रेडिट यूटिलाइजेशन मतलब आपकी कुल लिमिट में से आप कितना इस्तेमाल कर रहे। मान लीजिए आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये और आप हर महीने 80-90 हजार रुपये खर्च कर रहे। भले ही आप पूरा बिल समय पर चुका दें लेकिन स्कोर पर इसका असर पड़ सकता।
बैंकों और लेंडर्स के नजरिए से यह एक अहम संकेत है। अगर आपका कार्ड हमेशा अपनी लिमिट के आसपास रहता है, तो यह दिखाता है कि आपके पास खर्च के लिए ज्यादा फाइनेंशियल बफर नहीं बचा है। यानी आप रोजमर्रा के खर्च के लिए भी क्रेडिट पर निर्भर हैं।
ज्यादा उपयोग से क्यों गिरता है स्कोर?
क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल संयम को पसंद करते हैं। अगर आपका खर्च लिमिट के 30-40 फीसदी से ऊपर जाता है, तो स्कोर पर दबाव शुरू हो जाता। कार्ड को पूरी तरह खर्च कर देना, लेट पेमेंट के बाद सबसे बड़ा खतरा (रेड फ्लैग) माना जाता है।
बैंक या कर्ज देने वाली संस्था को चिंता इस बात की नहीं होती कि आपने इस महीने भुगतान किया या नहीं। उन्हें यह देखना होता है कि अगर अचानक आपकी आय कम हो जाए या खर्च बढ़ जाए, तो क्या आप संभाल पाएंगे?
स्टेटमेंट डेट का जाल
कई लोग सोचते हैं कि पूरा बिल भर देने से सब ठीक है। लेकिन असली खेल स्टेटमेंट डेट का है। बैंक आमतौर पर क्रेडिट ब्यूरो को वही बैलेंस रिपोर्ट करते हैं, जो स्टेटमेंट जनरेट होने की तारीख पर होता है, न कि भुगतान की तारीख पर।
अगर स्टेटमेंट के दिन आपका कार्ड लगभग फुल है, तो वही हाई बैलेंस रिपोर्ट होगा, भले ही आप कुछ दिन बाद पूरा भुगतान कर दें। आपका स्कोर उसी रिपोर्टेड आंकड़े के आधार पर तय होता है।
एक कार्ड भी बिगाड़ सकता खेल
जरूरी नहीं कि आप सभी कार्ड फुल करें। अगर आपके पास सिर्फ एक कार्ड है और उसकी लिमिट कम है, तो सामान्य खर्च भी यूटिलाइजेशन को ऊंचा दिखा सकता है। इससे ओवरऑल क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ता है।
कैसे रखें स्कोर सुरक्षित?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि क्रेडिट यूटिलाइजेशन 30 फीसदी से नीचे रखें। अगर जल्द लोन लेना है तो 20 फीसदी से कम रखना बेहतर है। जरूरत हो तो स्टेटमेंट डेट से पहले आंशिक भुगतान कर दें। या फिर लिमिट बढ़वाने का अनुरोध करें, ताकि अनुपात बेहतर दिखे। क्रेडिट कार्ड समझदारी से इस्तेमाल करने का मतलब सिर्फ समय पर भुगतान नहीं, बल्कि लिमिट से दूरी बनाए रखना भी है। वरना बिना गलती किए भी स्कोर फिसल सकता है।
(प्रियंका कुमारी)










