नई दिल्ली। भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर आधिकारिक बातचीत की शुरुआत हो गई है। इस दिशा में दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला अहम कदम माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समझौते का लक्ष्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना, नई तकनीकों में सहयोग मजबूत करना और निवेश प्रवाह को तेज करना है। इससे भारत और खाड़ी क्षेत्र के छह देशों के बीच आर्थिक भागीदारी और गहरी हो सकती है।
पीयूष गोयल व अल बुदैवी ने किए हस्ताक्षर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जीसीसी महासचिव जासेम मोहम्मद अल बुदैवी के साथ इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। जीसीसी समूह में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि 5 फरवरी 2026 को तय किए गए टर्म्स ऑफ रेफरेंस के आधार पर अब व्यापक और पारस्परिक लाभ वाले समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू की जा रही है। यह समझौता केवल आयात-निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने, सेवाओं के आदान-प्रदान को सुगम करने और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान देगा।
डील से दोनों पक्षों को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
डिजिटल व्यापार और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में साझेदारी से दोनों पक्षों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा निवेश के नए अवसर खुलने से भारतीय कंपनियों को खाड़ी देशों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा। भारत पहले ही जीसीसी के दो सदस्य देशों के साथ अलग-अलग व्यापार समझौते कर चुका है और अन्य देशों के साथ भी वार्ता जारी है। यह नई पहल 2004 से लंबित पड़ी व्यापक व्यापार वार्ता को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति, रणनीतिक निवेश और प्रवासी भारतीयों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस समझौते की अहमियत दिखाते हैं आंकड़े
आर्थिक आंकड़े भी इस साझेदारी की अहमियत को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसमें भारत का निर्यात करीब 57 अरब डॉलर और आयात लगभग 122 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा है। खासतौर पर सऊदी अरब और यूएई भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह एफटीए सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत के पेट्रोकेमिकल, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और सेवा क्षेत्र को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही, मध्य-पूर्व के साथ भारत का व्यापार संतुलन और रणनीतिक प्रभाव भी मजबूत होगा।










