Share Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार की सुबह काफी निराशाजनक रही। अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों में हुई भारी बिकवाली और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर 'AI टेक सेल-ऑफ' का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
बाजार की खराब शुरुआत और प्रमुख सूचकांक
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ही भारतीय इक्विटी मार्केट ने पिछले सत्र की बढ़त को गंवा दिया। सुबह 9.26 बजे तक सेंसेक्स 577 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,717 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 161 अंक यानी 0.63 प्रतिशत लुढ़ककर 25,552 पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट का रुख रहा; निफ्टी मिडकैप 100 में 0.55 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
आईटी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी आईटी (Nifty IT) में सबसे अधिक 2.84 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी और मीडिया सेक्टर भी क्रमश: 0.90 और 0.32 प्रतिशत टूटकर कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, मेटल (0.44 प्रतिशत ऊपर) और ऑयल एंड गैस (0.32 प्रतिशत ऊपर) सेक्टर में हल्की बढ़त देखी गई है। आईटी सेक्टर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हुई बिकवाली को माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित 15 प्रतिशत के नए वैश्विक टैरिफ ढांचे ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद Reciprocal Tariffs पर रोक लगाने की खबर आई है, फिर भी निर्यात आधारित क्षेत्रों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-भारत व्यापार व्यवस्था के बीच ट्रम्प की घोषणाएं निकट भविष्य में निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं।
निफ्टी के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट (Support) 25,600 से 25,500 के दायरे में है। यदि बाजार इससे नीचे गिरता है तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, ऊपर की ओर 25,800 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) के तौर पर काम कर रहा है। एशियाई बाजारों की बात करें तो चीन और जापान के शेयर बाजारों में मामूली बढ़त देखी गई, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख
सोमवार यानी 23 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 3,483 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 1,292 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे। हालांकि, आज के शुरुआती रुझान बताते हैं कि वैश्विक नकारात्मक संकेतों के कारण निवेशक अभी 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रहे हैं और बाजार में सावधानी बरत रहे हैं।










