ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग हिंद महासागर तक पहुंच गई है, जहां श्रीलंका के पास एक ईरानी जहाज पर पनडुब्बी से हमला किया गया।

नई दिल्ली : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग अब मध्य पूर्व से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गई है। युद्ध के पांचवें दिन, श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी जहाज को पनडुब्बी से निशाना बनाया गया है।

इस हमले के बाद जहाज पर भारी तबाही मची है, जिसमें दर्जनों लोग हताहत हुए हैं और कई नाविकों के समुद्र में लापता होने की खबर है। श्रीलंकाई नौसेना ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

​समुद्र के भीतर से हुआ घातक प्रहार

​श्रीलंकाई नौसेना के मुताबिक, श्रीलंका के तट के करीब से गुजर रहे एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर अचानक पनडुब्बी से हमला हुआ। हमले के दौरान जहाज पर मौजूद चालक दल को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

मिसाइल या टॉरपीडो के टकराने से जहाज के एक बड़े हिस्से में आग लग गई और वह डूबने की कगार पर पहुँच गया। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह पनडुब्बी किस देश की थी, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव को देखते हुए इसे इजरायल या अमेरिकी गठबंधन की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

​श्रीलंकाई नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन: 32 नाविकों को बचाया

​हमले की सूचना मिलते ही श्रीलंकाई नेवी ने अपने राहत और बचाव पोतों को घटना स्थल की ओर रवाना किया। नौसेना ने अब तक जहाज से 32 घायल नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कई अन्य लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए समुद्र में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

​'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान को भारी नुकसान

​अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी इस जंग को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया है, जिसका अर्थ 'भयंकर गुस्सा' है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ईरान के 17 जहाजों को तबाह किया जा चुका है, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है।

इस पूरे ऑपरेशन में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 200 फाइटर जेट और दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं। अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और ड्रोन यूनिट्स को पूरी तरह नष्ट करना है।

​लेबनान में मानवीय संकट: 65 हजार लोग विस्थापित

​इजरायली हमलों के कारण न केवल ईरान बल्कि लेबनान में भी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। लेबनान की सामाजिक मामलों की मंत्री हनीन सैयद के अनुसार, अब तक करीब 65 हजार लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।

इसके अतिरिक्त 10 से 20 हजार लोग अभी भी सुरक्षित रास्तों की तलाश में हैं। लोग काफी चिंतित हैं क्योंकि 2024 के युद्ध की यादें अब भी ताजा हैं, जब ड्रोन और धमाकों की आवाजें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं।

​सीरिया ने बंद की लेबनान सीमा, हमलों की चेतावनी

​युद्ध के और अधिक फैलने की आशंका के बीच सीरिया ने लेबनान से लगने वाली अपनी 'जदेइदेत याबूस' बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया है। इजरायल ने चेतावनी दी थी कि उसकी सेना इस बॉर्डर क्रॉसिंग को निशाना बना सकती है, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से लोगों के बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, लेबनान से सीरिया आने वाले नागरिकों के लिए सीमा फिलहाल खुली रखी गई है ताकि मानवीय आधार पर उन्हें प्रवेश मिल सके।