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नेपाल संसदीय चुनाव की मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी 62 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि केपी शर्मा ओली झापा-5 सीट से पीछे हैं।

नेपाल में संसदीय चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (RSP) ने बड़ा उलटफेर करते हुए मजबूत बढ़त बना ली है।

अब तक आए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 165 सीटों के रुझानों में RSP 107 सीटों पर आगे चल रही है और 1 सीट जीत चुकी है, जिससे नेपाल की राजनीति में नई युवा लहर देखने को मिल रही है।

दूसरी ओर गगन थापा की नेपाली कांग्रेस 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (UML) केवल 4 सीटों पर ही आगे चल रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केपी शर्मा ओली खुद झापा-5 सीट से करीब 10000 वोटों से पीछे चल रहे हैं, जहां उनका मुकाबला बालेन शाह से है।

यह चुनाव नेपाल की राजनीति में युवा बनाम पुराने राजनीतिक दिग्गजों की सीधी टक्कर माना जा रहा है।

नेपाल चुनाव LIVE: शुरुआती रुझान

पार्टी    

जीत  

 बढ़त

राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (RSP)   3 110
नेपाली कांग्रेस   2 11
CPN-UML   0   11
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP)     1 7
अन्य     0  9

युवा आंदोलन के बाद हो रहे हैं चुनाव
यह चुनाव पिछले साल सितंबर में हुए युवा-प्रधान (Gen Z) प्रदर्शनों के बाद हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया था और पुरानी सरकार गिर गई थी।

गुरुवार को हुए मतदान में 60% से ज्यादा मतदाताओं ने वोट डाला, जो नेपाल में लोकतांत्रिक भागीदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

नेपाल के चुनाव आयोग के अनुसार मतगणना में 3 से 4 दिन लग सकते हैं और कोशिश है कि 9 मार्च तक पूरी काउंटिंग पूरी कर ली जाए।

नेपाल की मिश्रित चुनाव प्रणाली (Mixed Electoral System)
एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो अलग-अलग चुनावी प्रणालियों को जोड़कर संसद के सदस्यों का चुनाव किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न समूहों को संसद में जगह देना है ताकि कोई एक पार्टी पूरी तरह हावी न हो सके।

​नेपाल में प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) की कुल 275 सीटों के लिए चुनाव दो तरीकों से होता है:-

​1. प्रत्यक्ष चुनाव (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट - FPTP)
सीटों की संख्या: कुल 275 में से 165 सीटों पर सीधा चुनाव होता है।
प्रक्रिया: देश को 165 निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र के मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं और जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह विजयी घोषित किया जाता है।

​2. आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation - PR)
सीटों की संख्या: बाकी बची 110 सीटें इस प्रणाली के तहत भरी जाती हैं।
प्रक्रिया: इस प्रणाली में मतदाता किसी उम्मीदवार को नहीं, बल्कि अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं।
सीटों का बंटवारा: पूरे देश में किसी पार्टी को कुल जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उन्हें संसद में सीटें दी जाती हैं।

​इस प्रणाली के लाभ
समावेशिता: यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व संसद में बना रहे।
विविधता: यह छोटे दलों को भी अपनी वोट हिस्सेदारी के आधार पर संसद में पहुँचने का अवसर देती है।
लोकतांत्रिक संतुलन: इसमें किसी एक दल के लिए पूर्ण बहुमत पाना कठिन हो जाता है, जिससे अक्सर गठबंधन सरकारों का निर्माण होता है।

​वर्तमान के चुनावों में इसी प्रणाली के कारण गणना में समय लग रहा है, जहाँ प्रत्यक्ष सीटों के नतीजे 24 घंटे में आ सकते हैं, वहीं पूरी 275 सीटों की स्थिति स्पष्ट होने में दो से तीन दिन या एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।

अंतरराष्ट्रीय नजर: भारत, चीन और अमेरिका की सक्रियता
​नेपाल की रणनीतिक स्थिति के कारण पड़ोसी देशों सहित महाशक्तियों की नजरें इन परिणामों पर हैं।

चीन का रुख: चीन ने अंतरिम पीएम सुशीला कार्की की सरकार के साथ संपर्क बनाए रखा है और हाल ही में 40 लाख डॉलर की सहायता भी दी थी।
अमेरिका का संकेत: अमेरिका ने साफ किया है कि वह नेपाल में बनने वाली किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के साथ काम करने को तैयार है।
भारत की प्राथमिकता: भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नेपाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का संपन्न होना है।

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