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ईरान के गराश में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र जमीन से 10 किमी नीचे था।

नई दिल्ली : ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच ईरान के दक्षिणी हिस्से में आए भूकंप ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रिक्टर स्केल पर 4.3 की तीव्रता वाले इस भूकंप के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह महज एक प्राकृतिक घटना है या फिर ईरान ने गुपचुप तरीके से कोई परमाणु परीक्षण किया है। हालांकि, वैज्ञानिक डेटा अभी इसकी पुष्टि नहीं करते हैं, लेकिन युद्ध के हालातों ने इन अटकलों को हवा दे दी है।

​10 किलोमीटर नीचे था भूकंप का केंद्र

​यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, 3 मार्च 2026 को आए इस भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे था। भूकंप ईरान के फार्स प्रांत स्थित गराश इलाके में महसूस किया गया। गराश, लारेस्तान क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा है और यह भूकंपीय रूप से काफी सक्रिय बेल्ट में आता है।

परमाणु परीक्षण के कयासों की वजह

​विशेषज्ञों के बीच इस भूकंप को लेकर संदेह इसलिए है क्योंकि अक्सर अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट के बाद 4.5 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपीय झटके दर्ज किए जाते हैं। वर्तमान युद्ध की स्थिति में यह माना जा रहा है कि ईरान अपनी परमाणु ताकत का प्रदर्शन कर इजराइल और अमेरिका को कड़ा संदेश देने की कोशिश कर सकता है। इसी संदेह के चलते लोग इसे प्राकृतिक भूकंप के बजाय 'न्यूक्लियर टेस्ट' से जोड़कर देख रहे हैं।

​गराश की भौगोलिक स्थिति और वैज्ञानिक तथ्य

​वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो गराश इलाका अरेबियन और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से बनी जाग्रोस फोल्ड थ्रस्ट बेल्ट पर स्थित है। इस क्षेत्र में 4 से 5 मैग्नीट्यूड के भूकंप आना काफी आम बात मानी जाती है। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि चूंकि यह क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय रूप से सक्रिय है, इसलिए इसे सीधे तौर पर सैन्य गतिविधि से जोड़ना जल्दबाजी हो सकती है।

​मिडिल ईस्ट में तनाव और 'साइबर वॉर' का साया

​मिडल ईस्ट के हालात इस समय बेहद नाजुक हैं। एक तरफ जहां इजरायल द्वारा ईरान के तकनीकी ढांचे और कैमरों को हैक करने की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के भूकंप ईरान की आंतरिक सुरक्षा और तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। अगर यह परमाणु परीक्षण साबित होता है, तो यह वैश्विक कूटनीति और युद्ध की दिशा को पूरी तरह बदल सकता है।

​क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

​फिलहाल आधिकारिक स्तर पर किसी भी परमाणु परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल और सेसमिक डेटा के गहन विश्लेषण के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह जमीन के अंदर का विस्फोट था या प्राकृतिक हलचल। लेकिन, 'नो स्मोक विदाउट फायर' की तर्ज पर इस समय हर छोटी हलचल को परमाणु कार्यक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

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