इंदौर। नीट पीजी-2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान एनआरआई कोटे की सीटों को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कुछ एनआरआई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) ने चौथे मॉप-अप राउंड में बची हुई एनआरआई सीटों को सामान्य वर्ग में बदल दिया, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें अंतिम चरण तक मौका मिलना चाहिए था।
इस फैसले को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में रिट याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वर्तमान प्रवेश नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि एनआरआई श्रेणी के उम्मीदवार पहले राउंड से लेकर मॉप-अप राउंड तक एनआरआई कोटे की सीटों के लिए पात्र रहते हैं।
नियम विरुद्ध है सीटों को समय से पहले बदलना
इसके बावजूद, यदि अंतिम चरण से पहले सीटों को जनरल कोटे में परिवर्तित कर दिया जाता है, तो यह योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन माना जाएगा। उनका कहना था कि जब तक पात्र एनआरआई छात्र उपलब्ध हैं, तब तक सीटों को किसी अन्य श्रेणी में स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि सीटों को समय से पहले बदलना न केवल निर्धारित नियमों के विपरीत है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन भी है। उनका कहना था कि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पात्र NRI को अंतिम दौर तक मौका मिले
यदि एनआरआई अभ्यर्थियों को उनका वैधानिक अवसर नहीं दिया जाता, तो यह भेदभावपूर्ण कदम माना जा सकता है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए डीएमई को निर्देश दिया कि पात्र एनआरआई अभ्यर्थियों को अंतिम राउंड तक मौका दिया जाए।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जब योग्य उम्मीदवार उपलब्ध हों, तब सीटों को सामान्य कोटे में बदलना उचित नहीं है। यह आदेश फिलहाल अंतरिम राहत के रूप में दिया गया है, लेकिन इससे प्रवेश प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।
यह फैसला NRI छात्रों के लिए अहम
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एनआरआई छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से अहम है। साथ ही, इससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में नियमों के सख्ती से पालन का संदेश भी जाता है।
अभिभावकों और छात्रों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित प्राधिकरण अदालत के निर्देशों का पालन करेगा और अंतिम काउंसलिंग राउंड तक एनआरआई कोटे की सीटें सुरक्षित रखी जाएंगी। कुल मिलाकर, यह मामला दर्शाता है कि प्रवेश प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमानुसार कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।










