Logo
मध्यप्रदेश में 20 फरवरी से 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होंगी। करीब 25 लाख विद्यार्थी इस बार परीक्षा देंगे। राज्य शिक्षा केंद्र ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष आईटी पोर्टल तैयार किया है। जिससे सभी काम आसानी से होंगे।  

भोपाल। मध्यप्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड की परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस बार लगभग 25 लाख विद्यार्थी इन परीक्षाओं में शामिल होंगे। इनमें सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल हैं। परीक्षा को सुव्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। परीक्षा से पहले विभाग ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की मैपिंग शुरू कर दी है। 

विशेष आईटी पोर्टल विकसित किया
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किस छात्र का परीक्षा केंद्र कौन सा होगा, किस शिक्षक की ड्यूटी कहां लगेगी और व्यवस्थाएं किस प्रकार संचालित होंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए एक विशेष आईटी पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से छात्रों का सत्यापन, परीक्षा केंद्रों का निर्धारण, केंद्राध्यक्षों की नियुक्ति, परीक्षा सामग्री का वितरण, रोल नंबर जारी करना और प्रवेश पत्र उपलब्ध कराना जैसे कार्य ऑनलाइन किए जा रहे हैं।

डिजिटल संचालित होंगे सभी कार्य
इतना ही नहीं, परीक्षा के दौरान उपस्थिति दर्ज करने से लेकर मूल्यांकन कार्य और अंकसूची जारी करने तक की व्यवस्था भी इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित की जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी। विभाग का मानना है कि तकनीक के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और भरोसेमंद बनेगी। इस वर्ष 522 निजी स्कूलों के 20,736 विद्यार्थियों के लिए भाषा विषयों के अलग प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, जो एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुरूप होंगे। 

प्रश्नपत्र NCERT पाठ्यक्रम के अनुरूप 
अन्य विषयों के प्रश्नपत्र राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों पर आधारित रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न पाठ्यक्रमों के अनुसार अध्ययन कर रहे छात्रों के साथ न्याय करना है, ताकि उन्हें उनके सिलेबस के अनुरूप प्रश्न मिल सकें। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि किसी छात्र का पंजीयन या आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा नहीं हो पाए हों, तब भी उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। 

केंद्राध्यक्षों को विशेष अधिकार दिए गए
हरजिंदर सिंह ने कहा इसके लिए केंद्राध्यक्षों को विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं, ताकि कोई भी छात्र केवल तकनीकी कारणों से अवसर से वंचित न रह जाए। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष प्रदेशभर के 1,10,615 स्कूलों के करीब 24.90 लाख विद्यार्थी परीक्षा में भाग लेंगे। इनमें 86,109 सरकारी स्कूल, 23,980 निजी स्कूल और 525 मदरसे शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजन अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है, जिसे विभाग डिजिटल माध्यम और सटीक योजना के जरिए सफल बनाने की तैयारी में है। 

5379487