जबलपुर। मध्य प्रदेश एटीएस ने फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कोलकाता से पांच अफगान नागरिकों को गिरफ्तार कर जबलपुर लाया गया, जहां उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड में दे दिया है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान शामिल हैं।
2018-19 के दौरान काबुल से नई दिल्ली पहुंचे
एटीएस को इनकी जानकारी पहले से गिरफ्तार सोहबत खान से पूछताछ में मिली थी। जांच में सामने आया कि ये सभी वर्ष 2018-19 के दौरान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से भारत पहुंचे थे। इनमें से कुछ दिल्ली के रास्ते आए और बाद में कोलकाता में जाकर रहने लगे। सुल्तान मोहम्मद मेडिकल वीजा पर भारत आया था, जबकि अन्य के प्रवेश को लेकर एजेंसियां जांच कर रही हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए इन लोगों ने जबलपुर में रह रहे अफगान नागरिक सोहबत खान से संपर्क किया।
जबलपुर के फर्जी पते पर बनवाए पासपोर्ट
आरोप है कि सोहबत और उसके साथियों ने प्रत्येक व्यक्ति से लगभग ढाई लाख रुपए लेकर पासपोर्ट बनवाने का वादा किया। इसके लिए फर्जी पहचान पत्र और निवास प्रमाण तैयार किए गए। जांच एजेंसियों को पता चला है कि पासपोर्ट आवेदन में जबलपुर के 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे पते दर्ज कराए गए थे, जो वास्तविक नहीं पाए गए। इन्हीं पतों के आधार पर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई गई और सत्यापन भी कराया गया। एटीएस के मुताबिक पांच में से चार आरोपियों के पासपोर्ट जारी हो चुके थे, जबकि एक का आवेदन खारिज कर दिया गया।
कार्रवाई के दौरान तीन पासपोर्ट जब्त किए गए
कार्रवाई के दौरान तीन पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं। एक पासपोर्ट गलत पते के कारण वापस लौट गया था। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा अगस्त 2025 में हुआ, जब छोटी ओमती इलाके में रह रहे सोहबत खान को एटीएस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने विदेशी नागरिकों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि सोहबत 2015 में भारत आया था और जबलपुर में एक महिला से निकाह कर यहीं रहने लगा था। बताया जाता है कि फर्जीवाड़े की शुरुआत अकबर नामक व्यक्ति के पासपोर्ट से हुई।
सोहबत की फोटो ने एजेंसियों का ध्यान खींचा
गिरोह के अन्य सदस्यों ने फर्जी पते और दस्तावेज तैयार किए। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पासपोर्ट जारी हुआ, जिसे डाक वितरण के दौरान ही कथित रूप से पैसे देकर हासिल कर लिया गया। सोहबत खान की सोशल मीडिया गतिविधियों ने भी एजेंसियों का ध्यान खींचा। उसने कथित तौर पर एके-47 के साथ अपनी तस्वीर साझा की थी, जिसके बाद एटीएस ने जांच तेज कर दी और पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। इस मामले में कोलकाता निवासी मोहम्मद इकबाल और अकबर के अलावा जबलपुर के कुछ स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है।










