भोपाल। राजधानी भोपाल में अवैध रूप से विकसित कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार बहुत धीमी है। इससे आम लोगों में असंतोष पैदा हो रहा है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति प्लॉटिंग और निर्माण के मामले सामने आए हैं, लेकिन इन पर व्यापक और एकसमान कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रशासन की ओर से गठित जांच दल ने जिले की अलग-अलग तहसीलों में 113 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया, लेकिन अब तक कुछ ही क्षेत्रों में इसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। विशेष रूप से हुजूर और कोलार तहसील में कुछ निर्माण कार्यों को रोका गया है। आंशिक तोड़फोड़ भी की गई है, जबकि अन्य इलाकों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
यह भी चर्चा में है कि प्रभावशाली बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज नहीं हो पा रही है। बैरसिया जैसे कुछ स्थानों में प्रकरण दर्ज किए गए, लेकिन टीटी नगर, गोविंदपुरा और बैरागढ़ जैसे शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सख्ती दिखाई नहीं दे रही। ग्रामीण इलाकों में अवैध प्लॉटिंग के कई उदाहरण सामने आए हैं, फिर भी प्रशासनिक अभियान हर जगह समान रूप से संचालित नहीं हो रहा। इससे लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि कार्रवाई चयनात्मक हो सकती है। कलेक्ट्रेट में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में नागरिक लगातार अवैध कब्जों और अनियमित कॉलोनियों की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
बड़े तालाब में लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण
बावजूद इसके, परिणाम उतने प्रभावी नहीं दिख रहे जितनी अपेक्षा की जा रही थी। शहर के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने बड़े तालाब में हो रहे अतिक्रण का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि सीमांकन के बिना अतिक्रमण पर नियंत्रण संभव नहीं है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है। अब जब मतदाता सूची से जुड़ी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो सीमांकन कार्य दोबारा शुरू करने की मांग तेज हो गई है। केरवा, कलियासोत और बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में हुए निर्माण भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
सख्त निगरानी और निरंतर कार्रवाई जरूरी
इन पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त निगरानी और निरंतर कार्रवाई की जरूरत है। कुछ स्थानों पर सीमित कार्रवाई हुई, लेकिन कई मामलों में विरोध या अन्य कारणों से प्रक्रिया अधूरी रह गई। भदभदा क्षेत्र में भी कार्रवाई के दौरान विरोध सामने आया था, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया कानूनी सुनवाई के तहत बढ़ाई जा रही है। जिला प्रशासन का कहना है कि अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जहां भी अनियमितता मिली हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। बड़े तालाब का सीमांकन कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। यह विषय शहर के नियोजित विकास, पर्यावरण संरक्षण और कानून के समान अनुपालन से जुड़ा हुआ है।










