इंदौर। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में चल रहे एक प्रशासनिक विवाद के बीच इंदौर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. जी.एल. सोढ़ी के पक्ष में निर्णय देते हुए उनके रिटायरमेंट आदेश पर रोक लगा दी है। अब वे 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहेंगे। मामला डॉ. सोढ़ी की सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति आयु को लेकर था।
इस आधार पर किया सेवा से अलग
विभाग ने यह कहते हुए उन्हें सेवा से अलग करने का आदेश जारी किया था कि उन्होंने आवश्यक 20 वर्ष की क्लीनिकल सेवा पूरी नहीं की है। रिकॉर्ड के अनुसार उनकी क्लीनिकल सेवा लगभग 17 साल 10 महीने पाई गई थी। साथ ही, विभाग ने उनकी उम्र 62 वर्ष पूरी होने के आधार पर भी रिटायरमेंट का निर्णय लिया था। इसी आधार पर मार्च 2026 में उन्हें सेवानिवृत्त मान लिया गया।
कोर्ट ने माना निर्णय प्रक्रिया में खामियां
हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने माना कि निर्णय प्रक्रिया में कई खामियां थीं और डॉ. जीएल सोढ़ी को सेवा से हटाने का निर्णय उचित तरीके से नहीं लिया गया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब डॉ. जीएल सोढ़ी को राहत मिली है और वे अपने पद पर कार्य जारी रख सकेंगे।
विभागीय प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर नियुक्ति और पदस्थापना के समय सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में समय पर जांच नहीं की गई। यही कारण रहा कि सालों के बाद सेवा अवधि और आयु को लेकर विवाद सामने आया। अगर आंकड़े दुरुस्त होते तो यह विवाद ही पैदा नहीं होता।










