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इंदौर में 12 घंटे के भीतर चाची-भतीजी के निधन के बाद परिवार ने लिया बड़ा फैसला। नेत्रदान से चार लोगों की जिंदगी में लौटी रोशनी। पढ़िए भावुक कर देने वाली पूरी खबर...

 इंदौर। एक स्थानीय परिवार ने गहरे शोक के समय में भी ऐसा निर्णय लिया, जिसने समाज के सामने करुणा और परोपकार की अनूठी मिसाल पेश की है। तलरेजा परिवार में केवल 12 घंटे के अंतराल पर महिला और भतीजी का निधन हो गया। यह परिवार को हिला देने वाली घटना थी, लेकिन इस असहनीय पीड़ा की घड़ी में भी उन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखा और दोनों दिवंगत सदस्यों की आंखें दान करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से चार दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी मिलने की संभावना बनी है।

एक ही परिवार में दो मौतें
इंदौर के गोपालबाग क्षेत्र में रहने वाली 84 वर्षीय मीरा देवी तलरेजा लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं। गुरुवार देर रात उनका निधन हो गया। परिवार अभी इस आघात से संभल भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन एक और दुखद समाचार मिला। शिवधाम निवासी उनकी 35 वर्षीय भतीजी लता तलरेजा का भी अचानक हृदयगति रुकने से निधन हो गया। लता अविवाहित थीं। उनके इस तरह असमय निधन से परिवार को गहरा सदमा लगा। दो मौतों ने पूरे परिवार को शोक में डुबो दिया।

चार लोगों के जीवन में भरा उजाला
दुख की इस घडी में तलरेजा परिवार ने उन दोनों के नेत्रदान का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि यदि उनके प्रियजन इस दुनिया में नहीं रहे, तो भी उनकी आंखों के माध्यम से किसी और की जिंदगी में प्रकाश लाया जा सकता है। सामाजिक संस्था के कुछ सदस्यों ने समन्वय स्थापित कर नेत्रदान की प्रक्रिया को समय पर पूरा करवाया। इस पहल से चार जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की आशा जाग उठी है, जो अब तक अंधकारमय जीवन जी रहे थे।

इंदौर में हर माह होते हैं 100 नेत्रदान
उल्लेखनीय है कि इंदौर में हर महीने लगभग 100 नेत्रदान के मामले सामने आते हैं। इससे पता चलता है कि लोग अब इस पुनीत कार्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसके बावजूद जरूरतमंदोंकी संख्या अभी बहुत अधिक है। इस मामले में और जागरूकता की जरूरत है। तलरेजा परिवार का नेत्रदान कर यह समाज को यह संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में उजाला ला सकता है।  उनका यह कदम आने वाली पीढ़ियों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा।  

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