Haryana UP Border Dispute: हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच लंबे समय चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने कदम उठाया है। सरकार ने डिमार्केशन कॉलम (सीमा निश्चित) करने के लिए 7.75 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए डिटेल्ड इस्टीमेट की मंजूरी मिल जाने के बाद इस पर काम शुरू करने के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद की वजह से किसानों के बीच अक्सर झगड़े भी देखने को मिलते हैं। यमुना नदी के लगातार बदलते मार्ग से भी विवाद बढ़ जाता है क्योंकि हरियाणा के किसान जिस जमीन पर खेती करते हैं, वो जमीन अक्सर उत्तर प्रदेश की तरफ चली जाती है।
दोनों राज्यों ने विवाद को लेकर की थी बैठक
जानकारी के मुताबिक दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए 1970 के दशक में दीक्षित समिति का गठन किया गया था। साल 1979 में दीक्षित पुरस्कार या हरियाणा-यूपी सीमा अधिनियम-1979 को उस समय नदी के प्रवाह के मुताबिक सीमा निर्धारित करने के लिए पेश किया गया था। लेकिन बाढ़ आने की वजह से कई सीमा स्तंभ बह गए थे, उन्हें हटा दिया गया था। जिसकी वजह से सालो बाद विवाद फिर से शुरू हो गया था।
विवाद पर चर्चा करने के लिए साल 2020 जनवरी में दोनों राज्यों ने बैठक भी की थी, जिसमें सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से गायब सीमा स्तंभों (खंभों) को फिर से बनाने के लिए कहा गया था। इस योजना के तहत यमुनानगर से पलवल तक यमुना के 300 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में दोनों राज्यों के PWD द्वारा स्तंभ लगाए जाने की बात शामिल की गई थी।
अक्टूबर 2020 में करनाल के बड़ी कलां गांव से परीक्षण की शुरुआत की गई थी। यहां पर सर्वे ऑफ इंडिया ने खंभों के लिए जगह की पहचान की थी, जिसमें हरियाणा पीडब्ल्यूडी के 20 खंभे लगाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन हरियाणा की ओर से केवल नौ खंभे ही लगाए गए। उत्तरप्रदेश पीडब्ल्यूडी के 24 खंभे लगाने के लिए कहा था। साल 2021 जून में परियोजना की समीक्षा भी की गई। लेकिन बाढ़ जैसी आपदाओं ने परियोजना की प्रगति पर रोक लगा दी।
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किस जिले में कितने खंभे लगेंगे ?
अब परियोजना के तहत करनाल में 604 खंभे लगाए जाएंगे, जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 302-302 खंभे लगाए जाएंगे। हरियाणा में विषम संख्या वाले खंभे लगेंगे जबकि उत्तर प्रदेश में सम नंबर वाले खंभे लगेंगे। करनाल में पहले से 302 जगह पर 85 खंभे लग चुके हैं, लेकिन अभी 217 खंभे लगाना शेष हैं।
पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के एक्सईएन संदीप सिंह ने कहा,'हम विस्तृत अनुमान की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर उत्तम सिंह ने हरियाणा और यूपी के किसानों के बीच भूमि विवादों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए इस परियोजना के महत्व पर जोर दिया।










