Delhi High Court: किसी भी लड़की को शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद कुंडली के नाम पर शादी से इनकार कर देना है अपराध हो सकता है। ऐसे ही मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने यह बात कही है। कोर्ट का मानना है कि ऐसा रवैया उस आदमी की से दिलाए गए वादे पर शक पैदा करता है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की तरफ से दाखिल की गई जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
एक युवक और युवती की जान-पहचान 2020 से थी, जो 2024 में रिश्ते में बदल गई। युवक ने युवती को शादी का बार-बार आश्वासन दिया और शारीरिक संबंध बनाए। उसने दावा किया कि उनकी कुंडली मैच हो गई है और शादी में कोई रुकावट नहीं आएगी। एक संदेश में उसने यहां तक लिखा कि 'कल ही हम शादी कर रहे हैं'। लेकिन बाद में युवक ने कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दिया। युवती ने पहले नवंबर 2025 में पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन युवक और उसके परिवार ने शादी का वादा करके मामला वापस ले लिया। फिर जनवरी 2026 में युवती ने दोबारा FIR दर्ज कराई, जिसमें IPC की धारा 376 (बलात्कार) और BNS की धारा 69 (धोखे से यौन संबंध) के तहत आरोप लगाए गए। युवती का कहना था कि युवक ने झूठे वादों से उसे धोखा दिया।
कोर्ट में सुनवाई
युवक ने दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की, जिसमें दावा किया गया कि रिश्ता सहमति से था और शादी न होने का कारण सिर्फ कुंडली का न मिलना था। बचाव पक्ष ने कहा कि यह महज एक टूटा रिश्ता है, न कि अपराध। लेकिन अभियोजन पक्ष ने व्हाट्सएप चैट्स और युवती के बयान पेश किए, जो दिखाते थे कि युवक ने बार-बार शादी का भरोसा दिलाया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने सामग्री का विश्लेषण किया और पाया कि युवक ने जानबूझकर युवती को गुमराह किया। कोर्ट ने नोट किया कि अगर कुंडली मैचिंग इतनी महत्वपूर्ण थी, तो इसे रिश्ता शुरू होने से पहले सुलझा लिया जाना चाहिए था, न कि बाद में बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
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कोर्ट का फैसला
जस्टिस शर्मा ने जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि यह मामला साधारण रिश्ता टूटने का नहीं, बल्कि धोखे का है। युवक के बार-बार दिए आश्वासनों से युवती को विश्वास हुआ कि शादी होगी, जिसके आधार पर संबंध बने। लेकिन बाद में कुंडली का बहाना बनाना संदेहास्पद है और BNS की धारा 69 के तहत अपराध बनता है, जिसमें धोखे से यौन संबंध बनाने पर 10 साल तक की सजा हो सकती है। कोर्ट ने प्राइमा फ़ेसी पाया कि युवक की मंशा शुरू से धोखेबाज थी, क्योंकि वह परिवार की कुंडली वाली शर्त जानता था, फिर भी झूठ बोला। जज ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।










