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Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को राहत मिली है। कोर्ट ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव की जीत के खिलाफ दायर की याचिका को खारिज कर दिया है।

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सीट से जीत को चुनौती देने वाली अपील (लेटर्स पेटेंट अपील) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह अपील एकल न्यायाधीश के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें सिसोदिया की जीत को चुनौती देने वाली मूल चुनाव याचिका को खारिज कर दिया गया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि यह अपील हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान का हवाला

अदालत ने स्पष्ट किया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) की धारा 116A के तहत चुनाव याचिका से संबंधित अपील सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जानी चाहिए। हाई कोर्ट इस स्तर पर ऐसी अपील को बनाए रखने योग्य नहीं मानता। खंडपीठ ने अपील की मेनटेनेबिलिटी (रखरखाव योग्यता) की कमी बताते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट का यह फैसला कानूनी प्रक्रिया की सीमाओं को मजबूत करता है और निचली अदालत के फैसले पर सीधे हस्तक्षेप से बचाता है।

याचिकाकर्ता ने अपील वापस ली

हाई कोर्ट के इनकार के बाद याचिकाकर्ता (प्रताप चंद्र) ने अपनी अपील वापस ले ली। इससे मामला आगे नहीं बढ़ सका। मूल चुनाव याचिका में सिसोदिया की जीत पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन एकल न्यायाधीश ने इसे साक्ष्यों की कमी और पर्याप्त आधार न होने के कारण पहले ही खारिज कर दिया था। अपील वापस लेने से यह विवाद अब समाप्त हो गया है, जब तक कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट न जाएं।

मनीष सिसोदिया के लिए राहत

यह फैसला AAP नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के लिए बड़ी राहत है। 2020 के चुनाव में पटपड़गंज से उन्होंने स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल की थी। कोर्ट के इस रुख से उनकी विधायकी पर कोई तत्काल खतरा नहीं रहा। यह घटना चुनावी विवादों में कानूनी प्रक्रियाओं की सख्ती को दर्शाती है, जहां बिना ठोस आधार के चुनौतियां आसानी से खारिज हो जाती हैं। कुल मिलाकर, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी अपीलें उच्चतम न्यायालय के दायरे में आती हैं।

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