AAP vs Congress in Delhi elections: दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बनता दिख रहा है। जहां आप और भाजपा सीधी टक्कर में हैं, वहीं कांग्रेस इस बार अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी, जो पिछले दो विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीती थी, इस बार कांग्रेस की संभावित वापसी को लेकर सतर्क है।
दरअसल, आम आदमी पार्टी के नेता पिछले कुछ हफ्तों से कांग्रेस को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'अप्रासंगिक' बता रहे हैं और उस पर भारतीय जनता पार्टी के साथ 'सांठगांठ' का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, अंदरूनी तौर पर पार्टी कांग्रेस के प्रचार अभियान पर करीब से नजर रख रही है, खासकर इन 10 अहम सीटों पर। इन सीटों में ओखला, चांदनी चौक और बवाना शामिल हैं, जहां कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार मैदान में हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन इलाकों में आप को कांग्रेस से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मुस्तफाबाद, सीलमपुर, सीमापुरी, रोहतास नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और बाबरपुर सीटों पर भी पेंच फंसने की उम्मीद है।
ओखला और चांदनी चौक में कांग्रेस का दबदबा
ओखला से कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ अहमद खान की बेटी अरीबा खान आप के अमानतुल्लाह खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, चांदनी चौक से वरिष्ठ कांग्रेस नेता जे.पी. अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल का मुकाबला आप के पुनर्दीप सिंह साहनी से है, जो मौजूदा विधायक परलाद सिंह साहनी के बेटे हैं। वहीं, बवाना से दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव आप के अजय यादव के खिलाफ खड़े हैं। यहां भी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि अमानतुल्लाह खान और अजय यादव जैसे आप उम्मीदवार अपनी सीटें बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आप की चिंता: कांग्रेस से भाजपा को फायदा
मीडिया से मुखातिब होते हुए, आप के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमें चिंता इस बात की नहीं है कि कांग्रेस सीटें जीत जाएगी, बल्कि यह है कि उसका बढ़ा हुआ वोट शेयर भाजपा की स्थिति को मजबूत कर देगा। दिल्ली में पिछले 27 सालों से विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर रहने वाली भाजपा के लिए यह चुनाव बेहद अहम है।
साल 2017 के नगर निगम चुनावों का उदाहरण देते हुए आप ने कहा कि कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था और आप के वोट शेयर को नुकसान पहुंचाया। 2015 में आप ने 54 फीसदी वोट शेयर के साथ विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन 2017 में एमसीडी चुनाव में यह घटकर 26 फीसदी रह गया। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 10 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गया। इससे भाजपा को फायदा हुआ और वह चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर पाई।
2025 का चुनाव: क्या आप के लिए बनेगी सबसे बड़ी चुनौती?
आप इस चुनाव को अपनी सबसे कठिन परीक्षा मान रही है। पार्टी के लिए राहत भरी स्थिति तब होगी, जब वह 70 में से 50 सीटें जीत लेगी। हालांकि, 60 सीटों के ऊपर जाना पार्टी के लिए बेहतर स्थिति माना जाएगी। पिछले एक साल में आप को कई झटके लगे हैं, जिसमें शराब नीति मामले में नेताओं की गिरफ्तारी और 4 विधायकों का पार्टी छोड़ना शामिल है। इनमें भाजपा से जुड़े पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत का नाम भी शामिल है।
क्या है जमीनी हकीकत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा और आप दोनों के लिए खास साबित हो सकता है। कांग्रेस का वोट शेयर अगर बढ़ता है, तो यह भाजपा को इनडायरेक्ट तौर पर फायदा पहुंचाएगा। आप ने 2015 और 2020 में भारी बहुमत से सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार चुनावी समीकरण बदल चुके हैं। पार्टी की लोकप्रियता पर कई सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में आप को अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
इस लिहाज से दिल्ली में आगामी चुनाव आप, कांग्रेस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है। जहां आप और भाजपा आमने-सामने हैं, वहीं कांग्रेस का प्रदर्शन दोनों के लिए चुनावी गणित को बदल सकता है। आप को कांग्रेस के बढ़ते वोट शेयर से चिंता है, क्योंकि इससे भाजपा मजबूत हो सकती है। इस चुनाव में आप को अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने के लिए रणनीतिक रूप से मजबूत होना होगा।









