सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित गोगुण्डा गांव में बिहान योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य गंगी मुचाकी ने पहली किराना दुकान शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने की दिशा में जिला प्रशासन के सतत प्रयास अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद कुमार के मार्गदर्शन में नियद नेल्लानार ग्रामों में विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।

इन्हीं प्रयासों का सशक्त उदाहरण है जनपद पंचायत कोंटा के अंतर्गत घोर नक्सल प्रभावित पहाड़ी ग्राम गोगुण्डा, जहाँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना ने महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। विद्या महिला संकुल संगठन के अंतर्गत राम स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती गंगी मुचाकी ने अपने घर पर ग्राम की पहली किराना दुकान प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

गाँव के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
उल्लेखनीय है कि, जिला प्रशासन की विशेष पहल से हाल ही में गोगुण्डा गांव में पहली बार बिजली पहुंची है। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विकास और निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। ऐसे सकारात्मक परिवर्तनों के बीच गंगी मुचाकी की दुकान का शुभारंभ ग्राम के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस दुकान के शुरू होने से ग्रामीणों को अब दैनिक उपयोग की सामग्री के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल न केवल सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि ग्राम में छोटे व्यवसायों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही है।

आर्थिक रूप से सशक्त होंगी महिलाएं 
बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। गोगुण्डा में कैंप स्थापना के बाद महिलाओं को संगठित कर समूहों से जोड़ा गया, जिससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए। किराना दुकान प्रारंभ होने से श्रीमती गंगी मुचाकी की आय में वृद्धि होगी और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। 

सामाजिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं 
इस सफलता के पीछे दुब्बाटोटा क्लस्टर की पीआरपी मंजू कट्टम का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने समूह गठन से लेकर दुकान संचालन तक निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। आने वाले समय में जिला प्रशासन के द्वारा और अधिक स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे, ताकि दूरस्थ ग्रामों में विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार हो सकें।