रायपुर। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में सोलर पैनल लगाने वालों का बिजली उत्पादन अगर ज्यादा होता है तो उनकी बिजली छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी 2.60 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदेगी। इसका हिसाब साल में एक बार होगा और उपभोक्ता की ज्यादा बिजली होने पर उनको पैसा मिलेगा। जहां तक पॉवर कंपनी से मिलने वाली बिजली का सवाल है तो सौ यूनिट की खपत करने पर करीब पांच रुपए यूनिट तक लग जाते हैं। ज्यादा खपत पर ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत बिजली के उपभोक्ता सोलर पैनल लगातर अपने घरों की छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से सब्सिडी भी दी जा रही है। जहां तीन किलोवाट के लिए केंद्र सरकार से 78 हजार की सब्सिडी मिल रही है, वहीं राज्य सरकार भी इसके लिए 30 हजार रुपए दे रही है। तीन किलोवाट का सोलर पैनल लगाने की लागत करीब एक लाख 80 हजार तक आती है। ऐसे में उपभोक्ता को अपनी जेब से 70 से 72 हजार ही लगाने पड़ रहे हैं।
तीन किलो वाट में 360 यूनिट बिजली
पॉवर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि, एक किलो वाट के सोलर पैनल में रोज करीब चार यूनिट बिजली बनती है। एक किलोवाट में 120 यूनिट बिजली मिल जाती है। ऐसे में तीन किलोवाट का सोलर पैनल लगाने पर 360 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। आमतौर पर जिनकी जितनी खपत है उसके हिसाब से ही उपभोक्ता सोलर पैनल का चयन करते हैं। लेकिन पॉवर कंपनी ज्यादा बिजली को खरीद भी रही है तो ऐसे में उपभोक्ता खपत से ज्यादा बिजली का उत्पादन करने के लिए भी सोलर लगा रहे हैं। पांच किलोवाट का सोलर पैनल भी लगाया जा रहा है।
ज्यादा बिजली लेगी पॉवर कंपनी
अगर किसी उपभोक्ता की बिजली की खपत हर माह दो सौ यूनिट ही है और उसने तीन किलो वाट का सोलर पैनल लगाया है तो इसकी 12 से 15 सौ यूनिट की बिजली अगर साल भर में बचती है तो इसके पैसे पॉवर कंपनी देगी। लेकिन इसकी कीमत उपभोक्ता को महज 2.60 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी।
पॉवर कंपनी की बिजली पांच रुपए
पॉवर कंपनी जो बिजली उपभोक्ताओं को देती है। वह पांच रुपए यूनिट से कम नहीं पड़ती है। पहले सौ यूनिट का टैरिफ भले 4.10 रुपए है। लेकिन इसमें जहां दस पैसे प्रति यूनिट सेस के लगते हैं। वहीं इसी के साथ इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी 11 फीसदी है। ऐसे में 4.10 रुपए पर 45 पैसे इसके लग जाते हैं। इसके अलावा प्रति किलो वाट पर 20 रुपए शुल्क है। ये सब मिलाकर 4.85 रुपए होते हैं। एफपीपीएएस शुल्क अलग से लगता है। यह कभी पांच फीसदी तो कभी दस फीसदी से ज्यादा हो जाता है। ऐसे में सौ यूनिट की खपत पर पांच रुपए ज्यादा ही लगते हैं। सौ यूनिट से ज्यादा की खपत पर कीमत और बढ़ जाती है।







