रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशकों से विवादों में रहे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के सीई केके कटारे का अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने यह आदेश जारी किया है। कटारे के खिलाफ जनपद पंचायत डोंगरगांव, जिला राजनांदगांव और विजय मिश्रा ने शिकायत की थी। इस संबंध में 23 फरवरी को समिति ने आदेश जारी किया है। दरअसल, श्री कटारे की जाति पर कोई प्रश्न नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र के मूल निवासी होने के कारण उन्हें छत्तीसगढ़ में आरक्षण लाभ की पात्रता नहीं मिलती।
आपको बता दें कि, सीई केके कटारे का विवादों से पुराना से नाता रहा है। उनके खिलाफ मनचाहे ठेकेदारों को टेंडर देने समेत कई शिकायतें की गई थी। लेकिन इसके बाद भी उन्हें प्रमोशन मिलता रहा। पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी उनके खिलाफ शिकायत कर जांच की मांग की थी। लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।
यह है पूरा मामला
मुख्य अभियंता के खिलाफ समिति ने जाति प्रमाण पत्र की जांच में ये तथ्य सामने आए कि, श्री कटारे के पिता अविभाजित मप्र में शासकीय सेवा में 1962 से 1993 तक थे। श्री कटारे के पिता के कोष लेखा पेंशन संबंधित दस्तावेज में ग्राम व पोस्ट तुमसर भंडारा उल्लेखित है। केके कटारे ने राष्ट्रपति अधिसूचना (अनुसूचित जाति वर्ग) 1950 के पूर्व पिता, पूर्वजों का ऐसा कोई दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं किया। जिससे यह सिद्ध हो सके कि, उनके पिता या पूर्वज 1950 के पहले मप्र के निवासी थे।
जांच में महाराष्ट्र के निवासी साबित हुए
खास बात यह है कि नियमानुसार अपनी जाति एवं सामाजिक स्थिति को साबित करने के लिए सुबूत का भार उस व्यक्ति का हो जो संवैधानिक लाभ प्राप्त किया हो। जांच से यह भी साफ हुआ कि केके कटारे का निवास स्थान तुमसर जिला भंडारा महाराष्ट्र है। आदेश में लिखा गया है कि केके कटारे को मप्र, छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आरक्षित वर्ग का लाभ लेने व आरक्षित वर्ग के अंतर्गत नौकरी प्राप्त करने की पात्रता नहीं है।
जाति पर नहीं मूल निवास पर था संदेह
इस मामले की सुनवाई के दौरान श्री कटारे ने समिति के समक्ष यह दलील पेश की थी कि शिकायतकर्ता के उनकी जाति खटिक अनुसूचित जाति होने पर कोई संदेह नहीं है। केवल मूल मिनाव तुमसर जिला भंडारा, महाराष्ट्र को लेकर शिकायत है कि मेरे द्वारा महाराष्ट्र राज्य होते हुए छग, मप्र में आरक्षण का लाभ कैसे लिया जा रहा है।
केके कटारे ने दीं ये दलीलें
मेरे मूल निवास के संबंध में मेरा कहना है कि, 1 नवंबर 56 के पूर्व तक निवास तुमसर जिला भंडारा वर्तमान में महाराष्ट्र- मप्र राज्य में शामिल था। जिसकी राजधानी नागपुर थी, मेरे पिता वर्ष 1953 से बालाघाट सिवनी में नौकरी कर रहे थे। उसी आधार पर वर्ष 1978 में तहसील वारासिवनी जिला बालाघाट (मप्र) से मैने जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था, वर्तमान में मेरी जाति संबंधी जांच मप्र में भी चल रही है। इस बयान के बात श्री कटारे को समिति ने 28 जनवरी 2026 एवं 5 फरवरी 2026 को बैठक में बुलाया गया था, लेकिन ये बैठक टल गई। फिर 23 फरवरी 2026 को फिर बैठक रखकर उन्हें बुलाया गया। लेकिन वे नहीं आए। लेकिन समिति को पत्र लिखकर अनुपस्थिति की सूचना दी।










