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छोटूराम धाम के संविधान में संशोधन विवाद के चलते हुड्डा खाप की अगुवाई में एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया गया।

रोहतक के  गांव जसिया स्थित सर छोटूराम धाम के संविधान संशोधन को लेकर जाट सेवा संघ में घमासान तेज हो गया है। मौजूदा कार्यकारिणी और पूर्व चेयरमैन यशपाल मलिक के बीच चल रहे इस विवाद के चलते आज सर छोटूराम धाम में हुड्डा खाप की अगुवाई में एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में संविधान संशोधन की रणनीति पर चर्चा की गई, हालांकि यशपाल मलिक ने पंचायत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

ट्रस्ट के मौजूदा संविधान की खामियां
जाट सेवा संघ के चेयरमैन एडवोकेट रणधीर सिंह ने बताया कि 2017 में गठित ट्रस्ट के मौजूदा संविधान में कई खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान में प्रावधान है कि ट्रस्टियों का कार्यकाल 5 वर्ष होगा, लेकिन ट्रस्टी चाहे तो इसे अपनी मर्जी से बढ़ा सकता है। रणधीर सिंह ने इसे 'लालच' करार देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद को 50 साल के लिए भी ट्रस्टी घोषित कर सकता है। फिलहाल ट्रस्टी बनाने का पूरा अधिकार केवल यशपाल मलिक के पास है। रणधीर सिंह का दावा है कि सभी मौजूदा ट्रस्टी उनकी मर्जी से बनाए गए हैं, न कि लोकतांत्रिक तरीके से। एडवोकेट रणधीर सिंह का आरोप है कि यशपाल मलिक द्वारा बनाए गए ट्रस्टियों में से 6 ऐसे हैं जिन्होंने ट्रस्टी बनने के लिए अनिवार्य 11 हजार रुपये का दान तक नहीं दिया है। इन लोगों को नियमानुसार हटाया गया है।

क्या है महापंचायत का मुख्य उद्देश्य
हुड्डा खाप और सर्वखाप के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य ट्रस्ट के संविधान में लोकतांत्रिक बदलाव करना है। रणधीर सिंह चाहते हैं कि भविष्य में ट्रस्टियों का चुनाव जिला कमेटियों के माध्यम से हो, ताकि संगठन में पारदर्शिता बनी रहे।

यशपाल मलिक ने पंचायत को बताया 'अवैध'
विवाद पर अपना रुख साफ करते हुए यशपाल मलिक ने पंचायत को ही खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "जो लोग खुद पर घोटाले के आरोप झेल रहे हैं, वे ही यह पंचायत बुला रहे हैं। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है कि आरोपी खुद ही पंचायत बुला रहे हैं।" मलिक ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस पंचायत में शामिल नहीं होंगे और न ही उन्हें इसमें आमंत्रित किया गया है। जहां एक तरफ मौजूदा कार्यकारिणी संविधान संशोधन पर अड़ी है, वहीं यशपाल मलिक के इस रुख ने विवाद को और गहरा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हुड्डा खाप और अन्य खाप प्रतिनिधि इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या अगला कदम उठाते हैं।

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