Logo
बलौदाबाजार के 119 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर ‘पुरानी कचहरी’ में शुक्रवार को आग लग गई। जिसके बाद कलेक्टर ने भवन को संरक्षित करने के निर्देश दिये। 

कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार शहर के मध्य स्थित पुराना तहसील भवन केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि शहर के इतिहास की जीवंत पहचान है। वर्ष 1907 में अंग्रेजी शासन काल में निर्मित यह भवन लगभग 851 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनाया गया था। स्थानीय लोग इसे आज भी 'पुरानी कचहरी' के नाम से जानते हैं।

ब्रिटिश शासन के समय यही वह स्थान था जहां कचहरी लगती थी और प्रशासनिक कार्य संचालित होते थे। इसी परिसर में बना पुराना जेल कक्ष आज भी मौजूद है, जहां उस दौर में कैदियों को रखा जाता था। इतने वर्षों बाद भी इस ऐतिहासिक परिसर के कई हिस्से सुरक्षित हैं, जो उस समय की वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक दिखाते हैं। शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे पुराने तहसील कार्यालय के एक हिस्से में अचानक आग लगने की घटना सामने आई। 

कलेक्टर ने पूरे परिसर का लिया जायजा 
आग रिकॉर्ड रूम के कुछ हिस्सों तक फैल गई, हालांकि प्रशासन और सीमेंट संयंत्र की दमकल टीम ने मौके पर पहुंचकर जल्द ही आग पर काबू पा लिया और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर कुलदीप शर्मा मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को आग लगने के कारणों की जांच के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह भवन ऐतिहासिक धरोहर है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

कलेक्टर ने मरम्मत के दिए निर्देश 
कलेक्टर ने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और भवन के पुनरुद्धार के लिए शीघ्र प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति लेने के निर्देश भी दिए। साथ ही जिले और विकासखंड मुख्यालयों में स्थित पुराने शासकीय भवनों में विद्युत वायरिंग की जांच के लिए विद्युत विभाग की टीम गठित कर प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए गए हैं।

एसडीओपी कार्यालय से शुरू हुई आग 
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग पुराने एसडीओपी कार्यालय की ओर से शुरू हुई, जो धीरे-धीरे तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड रूम और नायब तहसीलदार कोर्ट की ओर फैल गई। दमकल टीम की तत्परता से आग को जल्द नियंत्रित कर लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। 

5379487