होली के दौरान दिल्ली और मुंबई से लखनऊ का हवाई किराया 16,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना अधिक है।

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत अन्य प्रमुख शहरों में होली मनाने के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों से आने वाले यात्रियों के सामने इस समय गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

त्योहार के ऐन वक्त पर हवाई टिकटों की कीमतें तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं, जबकि भारतीय रेलवे की लगभग सभी मुख्य ट्रेनों में 'नो रूम' और 'रिग्रेट' की स्थिति पैदा हो गई है। यह स्थिति उन लाखों प्रवासियों के लिए चिंता का विषय है जो साल भर इस त्योहार का इंतजार करते हैं।

​विमानों का किराया आसमान पर और यात्रियों की मजबूरी

​होली के पर्व के मद्देनजर विमानन कंपनियों ने किरायों में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे सामान्य दिनों में 4 से 5 हजार रुपये में मिलने वाले टिकट अब 10 से 16 हजार रुपये तक पहुँच गए हैं। मुंबई से लखनऊ आने वाली इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस का किराया 2 और 3 मार्च के लिए 10,400 से लेकर 16,193 रुपये तक दर्ज किया गया है।

इसी तरह दिल्ली से लखनऊ का किराया भी सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुना होकर 8,000 रुपये के पार निकल गया है। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों से आने वाले यात्रियों को भी 8,000 से 12,251 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए हवाई सफर बजट से पूरी तरह बाहर हो गया है।

​रेलवे में सीटों की भारी किल्लत और नो रूम की स्थिति

​रेलवे की स्थिति हवाई सफर से भी अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहाँ लखनऊ आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में 'नो रूम' या 'रिग्रेट' (बुकिंग बंद) की स्थिति पैदा हो गई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश आने वाले करीब 70,000 से अधिक यात्री Waiting List में दर्ज हैं, जिसके चलते नियमित ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।

दिल्ली रूट पर चलने वाली तेजस एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेनों में भी वेटिंग का आँकड़ा 50 के पार पहुँच गया है, जबकि लखनऊ मेल के स्लीपर कोच में 3 मार्च के लिए 118 से अधिक वेटिंग दर्ज की गई है।

​मुंबई और दिल्ली रूट पर ट्रेनों में बुकिंग हुई बंद

​मुंबई से लखनऊ आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं, जहाँ पुष्पक एक्सप्रेस और कुशीनगर एक्सप्रेस जैसी लोकप्रिय गाड़ियों में बुकिंग 'रिग्रेट' की श्रेणी में पहुँच गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब इन ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी मिलना बंद हो गया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली से आने वाली ट्रेनों के थर्ड एसी और स्लीपर क्लास में वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलना लगभग असंभव सा हो गया है। ऐसी विकट स्थिति में लोग अब निजी बसों या टैक्सियों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जहाँ उनसे मनमाना किराया वसूला जा रहा है।

​तत्काल कोटे की सीमित सीटों पर टिकी हजारों की उम्मीदें

​नियमित टिकट न मिलने के कारण अब हजारों यात्रियों की आखिरी उम्मीद केवल तत्काल कोटे की महज 4,200 सीटों पर टिकी है। इन सीटों के लिए यात्रा से ठीक एक दिन पहले सुबह बुकिंग खुलती है, जिसमें कन्फर्म टिकट पाना किसी लॉटरी जीतने जैसा हो गया है। रेलवे स्टेशन के काउंटरों और ऑनलाइन पोर्टल पर एक साथ हजारों लोगों के सक्रिय होने से तत्काल कोटे की सीटें कुछ ही सेकंडों में भर जाती हैं। यात्रियों की इस भारी भीड़ को संभालने के लिए रेलवे ने कुछ होली स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय तो लिया है, लेकिन सीटों की अत्यधिक मांग के मुकाबले ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।