भोपाल, दीपेश कौरव
दरअसल, अभी तक राज्य शिक्षा केंद्र जिलों के स्कूलों में अंकसूची का प्रोफार्मा तैयार कर जिलों के स्कूलों में भेजता था। जिससे स्कूल में प्रोफार्मा पर अंक भरकर स्कूल प्राचार्य के हस्ताक्षर के बाद विद्यार्थियों को अंकसूची दी जाती थी। इससे कई जिलों में डुप्लीकेट अंकसूची का मामला भी सामने आया है।साथ ही अंकसूची एक-दो साल की देरी से मिलती थी, लेकिन अब 10वीं 12वीं तर्ज पर व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
10वीं व 12वीं परीक्षा की अंकसूची डिजिटल प्रिंटिंग होती थी
अभी तक मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं परीक्षा की अंकसूची डिजिटल प्रिंटिंग होती थी। साथ ही उसपर हॉलमार्क भी रहता था। अब 5वीं 8वीं में भी यह व्यवस्था रहेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-25 से पांचवीं व आठवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची को डिजिटल प्रिंटिंग की पूरी तैयारी कर ली है। पांचवीं व आठवीं की अंकसूची पर दो जगहों पर हॉलमार्क रहेगा। एक जहां पर कक्षा का नाम लिखा होगा और दूसरा जहां पर पूरी बाउंड्री बनी होगी। इससे डुप्लीकेट अंकसूची की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।









