हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी खराब रही। सोमवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा, जिससे बाजार में बिकवाली हावी रही।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 72,565 के स्तर पर खुला, जो लगभग 1.38% की गिरावट दर्शाता है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 267 अंक गिरकर 22,549 पर आ गया।
हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव
आज बाजार में लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में नजर आए। सबसे ज्यादा दबाव PSU बैंक और केमिकल शेयरों पर देखने को मिला, जो करीब 3-4% तक टूट गए। इसके अलावा रियल्टी, ऑटो और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर भी 3% तक गिर गए।
चौंकाने वाली बात यह रही कि आमतौर पर सुरक्षित माने जाने वाले FMCG, IT और फार्मा सेक्टर भी इस गिरावट से नहीं बच सके और इनमें भी 2% तक की कमजोरी दर्ज की गई।
जंग का असर बाजार पर
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब बाजार की दिशा तय कर रहा है। हाल ही में ईरान द्वारा इजरायल के एक केमिकल प्लांट पर हमले और उसके जवाब में इजरायल की कार्रवाई ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इसी का असर है कि 28 फरवरी से अब तक प्रमुख इंडेक्स लगभग 10% तक गिर चुके हैं।
आगे क्या? सपोर्ट और रेजिस्टेंस
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए फिलहाल 22,450–22,500 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 22,950–23,000 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अभी जल्दबाजी से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देना चाहिए। नई खरीदारी तभी बेहतर मानी जाएगी जब निफ्टी 24,000 के स्तर को मजबूती से पार कर ले।
कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंता
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 3.66% चढ़कर 116.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो साल का उच्च स्तर छूने के करीब है। वहीं, WTI क्रूड भी 103 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा है। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है और इसका असर बाजार पर आगे भी दिख सकता है।
ग्लोबल मार्केट भी दबाव में
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट देखी गई। अमेरिका में S&P 500 करीब 1.67% गिरा, जबकि Nasdaq में 2% की कमजोरी आई। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 4% तक टूट गया, वहीं हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार भी लाल निशान में बंद हुए।










