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Closing Bell: मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे तेल की वजह से बाजार में भारी गिरावट। सेंसेक्स 1700 अंक टूटा और निफ्टी 22,300 के पास पहुंचा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी से दबाव बढ़ा

Closing Bell: हफ्ते की शुरुआत शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रही। 30 मार्च को लगातार दूसरे दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। दोपहर 3 बजे तक सेंसेक्स 1719 अंक (2.34%) गिरकर 71864 पर आ गया जबकि निफ्टी 507 अंक (2.22%) टूटकर 22312 के करीब पहुंच गया।

बाजार में कमजोरी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 3393 शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ 714 शेयर ही बढ़त में थे।

6 साल में सबसे खराब मार्च 
मार्च महीने में ही सेंसेक्स और निफ्टी करीब 10.5% तक गिर चुके, जो मार्च 2020 (कोविड काल) के बाद सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा। वित्त वर्ष 2026 का आखिरी दिन भी बाजार के लिए भारी रहा और यह पूरे साल के सबसे कमजोर दौरों में शामिल हो गया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो इस महीने करीब 60 फीसदी बढ़ चुका है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मिडिल ईस्ट में हालात बिगाड़ दिए हैं। यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है।विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह संकट जारी रहा तो भारत की जीडीपी ग्रोथ, कॉर्पोरेट कमाई और महंगाई पर सीधा असर पड़ेगा।

बैंकिंग शेयरों पर दबाव
आरबीआई के नए नियमों ने बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के विदेशी मुद्रा एक्सपोजर पर लिमिट तय कर दी है, जिससे कई बड़े बैंकिंग शेयर 2-2.5% तक टूट गए। इस फैसले के चलते डॉलर की बिकवाली और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने मार्च में रिकॉर्ड 1.18 लाख करोड़ की बिकवाली की। सिर्फ शुक्रवार को ही 4367 करोड़ के शेयर बेचे गए। वैश्विक अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी और तेल की कीमतों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
भारतीय रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के पार चला गया। मार्च तिमाही में यह करीब 4.4% कमजोर हुआ है। वहीं, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड भी 7% के ऊपर पहुंच गई, जो 21 महीने का उच्च स्तर है।

आगे बाजार में क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे फाइनेंशियल्स अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर हैं, जहां निवेश के मौके बन सकते हैं।

(प्रियंका कुमारी)

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