S Jaishankar vs Rahul Gandhi: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिनेवा में भारतीय प्रवासी को संबोधित करते हुए कहा कि ज़िंदगी "खटा-खट" नहीं होती, बल्कि इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। जयशंकर ने यह बयान राहुल गांधी के खटा-खट वाले बयान पर तंज कसते हुए दिया। बता दें कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि कांग्रेस सत्ता में आते ही सभी समस्याओं को 'खटा-खट' हल कर देगी।
'इन्फ्रास्ट्रक्चर और नीतियों के बिना विकास नहीं'
जयशंकर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और मानव संसाधन के विकास पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि जो लोग काम करते हैं, वे मेहनत और नीतियों की अहमियत को समझते हैं। मानव संसाधन (Human Resources) और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) के बिना कोई भी देश सशक्त नहीं बन सकता। विदेश मंत्री ने कहा कि आज भारत में इस दिशा में काम को और तेज करने की मंशा है। उनकी बातों से यह साफ था कि विकास के लिए निरंतर प्रयासों की जरूरत होती है।
'बिना निर्माण के बड़ी ताकत नहीं बन सकते'
विदेश मंत्री ने कहा कि कोई भी देश बड़ी ताकत बनने के लिए निर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि भारत इसे नहीं कर सकता, लेकिन तकनीक के विकास के लिए निर्माण बेहद आवश्यक है। बिना निर्माण के हम बड़ी ताकत नहीं बन सकते। इस संदेश के भारत के निर्माण और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है और इस दिशा में काम किया जा रहा है।
'मानव संसाधन में भारत ने हासिल की बड़ी उपलब्धि'
एस जयशंकर ने कहा कि मानव संसाधन (Human Resources) के क्षेत्र में भारत ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। उन्होंने कहा कि बीते दस साल में भारत ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन अभी यह शुरुआत भर है। हमारी उपलब्धियां हमें संतोष देने के लिए नहीं हैं, बल्कि आगे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करने वाली हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने मानव संसाधन विकास की गति भविष्य में और भी तेज करने वाला है।
'दुनिया भारत की ओर देख रही है'
जयशंकर ने कहा कि जब मैं दुनिया भर के दौरे पर जाता हूं, तो विदेशी नेता भारत में हो रहे बदलवों में गहरी दिलचस्पी दिखाते हैं। दुनिया भर में भारत का प्रभाव (India's Global Influence) बढ़ा है। आज भारत की नीतियां और विकास मॉडल अन्य देशों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। कई देश भारत के खाद्य वितरण प्रणाली और आयकर संग्रह के तरीकों में रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश की नीतियों में दुनिया के लिए सीख है।
'उपलब्धियां प्रेरित करने के लिए होती हैं'
जयशंकर ने अपने भाषण का समापन इस संदेश के साथ किया कि उपलब्धियां हमें प्रेरित करने के लिए होती हैं, न कि संतुष्ट होने के लिए। उन्होंने कहा कि यदि हम दो कार्यकाल में इतना कर सकते हैं, तो तीसरे में कितना और कर सकते हैं? भारत के विकास के प्रति हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक है। हम भारत को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।









