नेपाल की राजनीति में चौंकाने वाला मोड़ आ गया जब नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पदभार संभालते ही कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने देश की पुरानी सियासी व्यवस्था को चुनौती देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर दिया।
इस अचानक हुई कार्रवाई से न केवल काठमांडू की सड़कों पर हंगामा शुरू हो गया है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। इसे बालेन शाह द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठाया गया साहसिक कदम माना जा रहा है।
बालेन शाह का ऐतिहासिक शपथ ग्रहण और कड़ा एक्शन
नेपाल के राजनीतिक इतिहास में 27 मार्च 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव की गवाह बनी। युवा नेता बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही स्पष्ट कर दिया कि उनका शासनकाल पारदर्शी होगा। कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर, उनके आदेश पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई ने न केवल नेपाल बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चौंका दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह कदम देश की व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है।
भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की पुनः जांच
केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी का मुख्य आधार भ्रष्टाचार के वे मामले हैं जिन्हें लंबे समय से दबाकर रखा गया था। बालेन शाह सरकार ने पिछले शासनकालों के दौरान हुए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सरकारी संपत्तियों के आवंटन में हुई अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है।
ओली पर सत्ता के दुरुपयोग और वित्तीय लाभ कमाने के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान हुए संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि करते हैं।
काठमांडू की सड़कों पर भारी तनाव और प्रदर्शन
ओली की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही नेपाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। उनकी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दे रहे हैं। काठमांडू के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। जहाँ एक ओर विपक्षी दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, वहीं युवाओं का एक बड़ा वर्ग बालेन शाह के इस फैसले को 'नए नेपाल' की शुरुआत मानकर इसका समर्थन कर रहा है।
भविष्य की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल
इस नाटकीय घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार अदालत में इन आरोपों को साबित कर देती है, तो बालेन शाह की लोकप्रियता और बढ़ेगी। हालांकि, यदि यह प्रक्रिया विफल रही, तो देश में नागरिक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
पड़ोसी देशों की नजरें भी इस घटनाक्रम पर टिकी हैं, क्योंकि नेपाल की आंतरिक उथल-पुथल का असर क्षेत्रीय कूटनीति पर पड़ना तय है। आने वाले दिन तय करेंगे कि नेपाल एक नई दिशा में बढ़ेगा या राजनीतिक अस्थिरता के जाल में फंसेगा।










