ईरान ने कुवैत के रणनीतिक बंदरगाह पर हमला कर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव तय माना जा रहा है।

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब खतरनाक तरीके से पूरे मध्य पूर्व में फैलता जा रहा है। शनिवार  ईरान ने एक और बड़ा दुस्साहस करते हुए कुवैत के एक प्रमुख बंदरगाह को निशाना बनाया है।

ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि इस सटीक हमले में वहां तैनात कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है।

हालांकि, अमेरिका और कुवैत की ओर से हताहतों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस हमले ने खाड़ी देशों में युद्ध की आग को और भड़का दिया है।

​कुवैत बंदरगाह पर मिसाइल और ड्रोन से हमला
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कुवैत स्थित रणनीतिक बंदरगाह पर सिलसिलेवार बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे। यह हमला उस समय हुआ जब बंदरगाह पर रसद और सैन्य उपकरणों की आवाजाही हो रही थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके इतने जोरदार थे कि उनकी गूँज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और बंदरगाह के एक बड़े हिस्से में भीषण आग लग गई। ईरान का कहना है कि यह हमला उन देशों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली ऑपरेशन्स के लिए करने दे रहे हैं।

​अमेरिकी सैनिकों की मौत का ईरानी दावा और हड़कंप 
ईरानी समाचार एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इस हमले में 'दर्जनों' अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह दशकों में अमेरिकी सेना पर हुआ सबसे बड़ा हमला होगा।

पेंटागन ने अभी तक केवल हमले की पुष्टि की है और हताहतों के विवरण की जांच करने की बात कही है। कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तत्काल 'मैक्सिमम अलर्ट' पर डाल दिया गया है और घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

​क्षेत्रीय सुरक्षा और कुवैत की स्थिति पर संकट
कुवैत, जो अब तक इस संघर्ष में काफी हद तक तटस्थ रहने की कोशिश कर रहा था, अब सीधे तौर पर युद्ध की चपेट में आता दिख रहा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह क्षेत्र में किसी भी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा।

इस हमले के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे पड़ोसी देशों में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। कुवैत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता पर प्रहार बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।

​वैश्विक तेल व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता असर 
कुवैत के बंदरगाह पर हुए इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में डर पैदा कर दिया है। कुवैत दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है और उसके बंदरगाहों पर हमले का सीधा मतलब है तेल की आपूर्ति में बाधा। शनिवार शाम तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक और उछाल देखा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने इसी तरह खाड़ी के अन्य व्यापारिक बंदरगाहों और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना जारी रखा, तो दुनिया को 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।