Middle East Tension: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक घोषणा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
ईरान ने भारत समेत अपने पांच मित्र देशों के जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित और निर्बाध गुजरने की अनुमति दे दी है।
#Iran FM Abbas #Araghchi: We permitted passage through the Strait of #Hormuz for friendly nations including China, Russia, India, Iraq, and Pakistan. pic.twitter.com/RvLtiwYB4v
— Consulate General of the I.R. Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) March 25, 2026
इस फैसले से दुनिया भर में बढ़ रहे तेल और गैस के संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भारत का अधिकांश तेल आयात इसी समुद्री मार्ग से होता है।
इन 5 देशों के लिए खुला रहेगा होर्मुज का रास्ता
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के मुताबिक, भारत के साथ-साथ चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की विशेष अनुमति दी गई है। इन मित्र देशों ने ईरान से संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी, जिसके बाद उचित समन्वय के जरिए उन्हें अनुमति प्रदान की गई।
अराघची ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह मार्ग सिर्फ 'दुश्मन देशों' और उनके सहयोगियों के लिए बंद है। चूंकि भारत और अन्य चार देश ईरान के मित्र हैं, इसलिए उनकी सप्लाई रोकने का कोई कारण नहीं है।
Non-hostile vessels, including those belonging to or associated with other States, may—provided that they neither participate in nor support acts of aggression against Iran and fully comply with the declared safety and security regulations—benefit from safe passage through the…
— I.R.IRAN Mission to UN, NY (@Iran_UN) March 24, 2026
भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक राहत
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यदि यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता, तो भारत जैसे देशों के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती थीं और ऊर्जा संकट खड़ा हो जाता। ईरान के इस फैसले से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
अब भारतीय तेल टैंकर और व्यापारिक जहाज बिना किसी डर के इस रास्ते से अपनी मंजिल तक पहुँच सकेंगे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी पहले इस मार्ग के बंद होने पर गहरी चिंता जताई थी, जिसे अब ईरान ने भारत के संदर्भ में सुलझा लिया है।
अमेरिका से बातचीत की खबरों का कड़ा खंडन
विदेश मंत्री अराघची ने उन चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे कोई औपचारिक बातचीत चल रही है। उन्होंने साफ किया कि वाशिंगटन अलग-अलग माध्यमों से संदेश भेज रहा है, लेकिन तेहरान इसे औपचारिक वार्ता नहीं मानता। उन्होंने दोटूक कहा कि 'बैकचैनल' से संदेशों का आदान-प्रदान करना औपचारिक कूटनीति नहीं है और फिलहाल अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है।
ईरान का सख्त रुख और शांति की अपनी शर्तें
ईरान ने इस फैसले के जरिए दुनिया को अपनी ताकत और होर्मुज पर अपने नियंत्रण का प्रदर्शन किया है। अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता और संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है, लेकिन समाधान उसकी अपनी शर्तों पर ही होगा, इन शर्तों में भविष्य में हमले न होने की गारंटी और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई शामिल है।
उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में अमेरिका अपने लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रहा है- वह न तो जल्दी जीत हासिल कर सका और न ही ईरान में सत्ता परिवर्तन कर पाया।








