नई दिल्ली : मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक संकट बन चुका है। इजराइल और अमेरिका के खिलाफ चल रही जंग के तीसरे दिन, सोमवार सुबह ईरान ने एक बेहद दुस्साहसिक कदम उठाते हुए सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी 'अरामको' (Saudi Aramco) की रास तनुरा (Ras Tanura) रिफाइनरी को अपना निशाना बनाया है। इस हमले के बाद एहतियात के तौर पर दुनिया के इस सबसे बड़े तेल डिपो को बंद कर दिया गया है।
JUST IN: 🇸🇦 Iran strikes Saudi Arabia's Aramco Ras Tanura oil refinery. pic.twitter.com/eTmPGRFAY5
— BRICS News (@BRICSinfo) March 2, 2026
ईरान के इस हमले ने सीधे तौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति की धमनियों पर प्रहार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है और पूरी दुनिया में तेल की किल्लत की आशंका पैदा हो गई है।
शाहेद-136 ड्रोन से रास तनुरा पर हमला, आसमान में छाया धुएं का गुबार
यह हमला ईरान द्वारा सोमवार सुबह सऊदी अरब के प्रमुख एनर्जी हब रास तनुरा पर किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस रिफाइनरी को निशाना बनाने के लिए अपने खतरनाक 'शाहेद-136' ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमले के तुरंत बाद रिफाइनरी के कुछ हिस्सों में आग भड़क उठी और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।
हालांकि, ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि आग रिफाइनरी के एक छोटे से हिस्से में लगी थी, जिसे जल्द ही काबू कर लिया गया और इसमें किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
हमले के बाद बंद की गई दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी
भले ही आग पर काबू पा लिया गया हो, लेकिन सुरक्षा कारणों और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियात के तौर पर इस विशाल तेल रिफाइनरी को फिलहाल बंद कर दिया गया है। रास तनुरा सऊदी अरामको का सबसे प्रमुख और दुनिया का सबसे बड़ा ऑफशोर ऑयल लोडिंग टर्मिनल माना जाता है।
इस रिफाइनरी की क्षमता लगभग 5.5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल रिफाइन करने की है। इसके बंद होने का मतलब है कि हर दिन लाखों बैरल तेल का उत्पादन और निर्यात रुक गया है, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा झटका है।
अमेरिका, यूरोप और एशिया को तेल निर्यात का मुख्य केंद्र
रास तनुरा रिफाइनरी का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि यहीं से बड़े-बड़े तेल टैंकरों में कच्चा तेल भरकर पूरी दुनिया में भेजा जाता है। यह टर्मिनल अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों के लिए तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल होर्मुज के इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, ऐसे में अगर ईरान ने तेल टर्मिनलों पर अपने हमले जारी रखे या इस रूट को बाधित किया, तो पूरी दुनिया को एक भयंकर तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
हमले की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड ऑयल में 9.32% का भारी उछाल
सऊदी अरब के इस तेल डिपो पर हुए हमले का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर देखने को मिला। रिफाइनरी पर हमले और उसके बंद होने की खबर आते ही वैश्विक तेल बाजार में खलबली मच गई। सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 9.32 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया, जो पिछले कई महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी है।
यदि यह रिफाइनरी लंबे समय तक बंद रहती है और मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ेगा।
कतर, बहरीन और UAE तक फैली ईरान की जंग की आग
यह हमला इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के तीसरे दिन हुआ है। ईरान ने अब अपने हमलों का दायरा बहुत बढ़ा दिया है। इजराइल को निशाना बनाने के साथ-साथ ईरान ने कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात पर भी बमबारी शुरू कर दी है।
इसके अलावा, इस क्षेत्रीय जंग में लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी पूरी तरह कूद पड़ा है। हिजबुल्लाह, ईरान के समर्थन से अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इजराइल के कई ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहा है, जिससे हालात और भी बेकाबू हो गए हैं।








