वाराणसी: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को कराए गए नाबालिग बटुकों के मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि हुई है।
हालांकि प्रशासन ने अभी इस रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन एक पीड़ित बटुक ने एक निजी चैनल के कैमरे के सामने आकर अपनी बात रखी।
मेडिकल रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि!
जांच की प्रक्रिया के तहत बुधवार को पीड़ित बटुक का मेडिकल परीक्षण और अन्य जांचें कराई गई थीं। पुलिस के सूत्रों का दावा है कि मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिग के साथ जबरन यौन कृत्य होने के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। यह रिपोर्ट शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट और संबंधित विशेष अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस सूत्रों द्वारा दी गई यह जानकारी यदि कोर्ट में साक्ष्य के रूप में टिकती है, तो शंकराचार्य के गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो सकता है।
पीड़ित का सनसनीखेज आरोप: 'शंकराचार्य और मुकुदानंद ने किया शोषण'
इस मामले में पहली बार एक पीड़ित वेदपाठी बटुक खुलकर सामने आया और उसने अपनी खौफनाक आपबीती बयां की। जब पीड़ित से पूछा गया कि इस कुकर्म के पीछे कौन है, तो उसने बिना झिझक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुदानंद का नाम लिया। पीड़ित ने बताया कि वेदों की शिक्षा के नाम पर उन्हें मठ बुलाया गया था, लेकिन वहां धर्म की आड़ में उनके साथ घिनौना कृत्य किया गया। पीड़ित के इस सीधे आरोप ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
'मैं अकेला नहीं, मेरे जैसे कई और वेदपाठी हुए शिकार'
पीड़ित बटुक ने इंटरव्यू के दौरान एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वह अकेला इस शोषण का शिकार नहीं है। उसके अनुसार, मठ में ऐसे कई और वेदपाठी बटुक हैं जिनके साथ लगातार कुकर्म किया गया है। पीड़ित का दावा है कि शोषण का यह चक्र काफी समय से चल रहा था और कई बच्चे डर के मारे चुप हैं।
शंकराचार्य का पक्ष: 'मेरे खिलाफ गहरी साजिश'
वहीं दूसरी ओर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे एक राजनीतिक और संस्थागत साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें उनके 'गौ माता' अभियान के कारण निशाना बनाया जा रहा है। स्वामी का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह झूठे हैं और वे जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि अग्रिम जमानत की सुनवाई से ठीक पहले इस तरह के दावों को हवा दी जा रही है।
कल हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकीं सबकी नजरें
पुलिस सूत्रों के इस दावे और पीड़ित के बयान के बीच, अब सबकी नजरें कल यानी 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली अग्रिम जमानत की सुनवाई पर टिकी हैं। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच यह तय करेगी कि क्या मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ित के आरोपों के आधार पर शंकराचार्य को राहत दी जाए या नहीं। वाराणसी और प्रयागराज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।