आगरा: कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और आगरा पुलिस ने इसे सच कर दिखाया है। 24 साल पहले एक शख्स ने बैंक को लाखों का चूना लगाया और पहचान बदलकर दिल्ली की गलियों में टैक्सी चलाने लगा। उसने सोचा था कि वह कभी नहीं पकड़ा जाएगा, लेकिन मंगलवार को पुलिस ने उसे आगरा के आईएसबीटी से उस वक्त दबोच लिया जब वह अपनी पत्नी की मदद से शहर में कदम रख रहा था। 10 हजार रुपये के इस इनामी बदमाश की गिरफ्तारी ने दो दशक पुराने फर्जीवाड़े के राज खोल दिए हैं।
फर्जी कागजों पर 8 लाख का लोन और फिर गायब
धोखाधड़ी की यह दास्तां साल 2002 में शुरू हुई थी। सिकंदरा निवासी प्रवीण ने न्यू आगरा क्षेत्र के एक बैंक से कार खरीदने के नाम पर फर्जी दस्तावेज लगाए और 8 लाख रुपये का कार लोन हड़प लिया। जब बैंक की किश्तें जमा नहीं हुईं और जांच शुरू हुई, तो पता चला कि प्रवीण ने बैंक को जो कागजात दिए थे, वे पूरी तरह फर्जी थे। पुलिस की दबिश से पहले ही प्रवीण अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर फरार हो गया।
दिल्ली में टैक्सी ड्राइवर बनकर गुजारे 24 साल
पुलिस की पकड़ से बचने के लिए प्रवीण दिल्ली भाग गया और वहां अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा। खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लिए उसने दिल्ली में टैक्सी चलाना शुरू कर दिया और वहीं किराये पर मकान लेकर रहने लगा। आगरा पुलिस ने साल 2005 में उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और उसे 'मफरूर' घोषित कर दिया था। समय बीतने के साथ प्रवीण को लगा कि पुलिस उसे भूल चुकी है, लेकिन उसकी फाइलों पर धूल नहीं जमी थी।
पत्नी से हुआ विवाद और खुल गया पुलिस के लिए रास्ता
प्रवीण की किस्मत ने तब पलटा खाया जब उसका अपनी पत्नी से किसी बात पर विवाद हो गया। विवाद के बाद उसकी पत्नी बच्चों को लेकर वापस आगरा आ गई और सिकंदरा क्षेत्र में किराये पर रहने लगी। पुलिस को हाल ही में सूचना मिली कि प्रवीण की पत्नी शहर में है। जब पुलिस ने पत्नी से पूछताछ की, तो उसने बताया कि पति की जालसाजी और धोखाधड़ी की आदतों के कारण वह उससे अलग हो गई है।
आईएसबीटी से हुई 10 हजार के इनामी की गिरफ्तारी
पत्नी से मिली जानकारी और उसकी मदद से न्यू आगरा पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। मंगलवार को जैसे ही प्रवीण दिल्ली से आगरा पहुंचा, पुलिस ने उसे आईएसबीटी पर ही दबोच लिया। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि आरोपी 24 साल से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।









