Akhilesh Yadav and Mayawati: अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक X एकाउंट पर मैसेज पोस्ट कर बसपा के संगठनात्मक बदलाव पर सवाल उठाए। कहा, निश्चचित ही यह उनका आंतरिक विषय है, लेकिन यह निर्णय हार की आशंका और खिसकते वोटबैंक को साधने के लिए किए जा रहे हैं। मायावाती ने इस पर पलटवार किया है। X पर लिखा कि दलित विरोधी सपा बसपा के आंतरिक फैसलों पर कुछ न ही बोले तो उचित होगा। वह अपने परिवार और यादव प्रत्याशियों की चिंता करें।
बसपा ने अपने संगठन में बड़े बदलाव का जो भी क़दम उठाया है वो उनकी पार्टी का आंतरिक विषय है। दरअसल इसके पीछे असली कारण ये है कि बसपा की एक भी सीट आती हुई नहीं दिख रही है क्योंकि बसपा के अधिकांश परंपरागत समर्थक भी इस बार संविधान और आरक्षण को बचाने के लिए इंडिया गठबंधन को ही वोट दे…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 8, 2024परिवार के प्रत्याशियों की चिंता करे सपा नेतृत्व
मायावती ने अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए लिखा, सपा नेतृत्व चुनाव में उतारे गए अपने परिवार और यादव प्रत्याशियों की चिन्ता करें, क्योंकि सबका हाल बेहाल है। सपा का चाल, चरित्र व चेहरा दलित, अति-पिछड़ा व संविधान विरोधी है। प्रमोशन में आरक्षण खत्म करना और संसद में बिल फाड़ने जैसे इनके काम माफ नहीं किए जा सकते।
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जातिवादी सोच के कारण बदले थे नाम
मायावती ने सपा सरकार के निर्णयों की आलोचना करते हुए लिखा, बीएसपी सरकार ने बहुजन समाज में जन्मे संत-गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान में जिलों, पार्कों, विश्वविद्यालयों के नाम रखे थे, लेकिन जातिवादी सोच के कारण सपा सरकार इन्हें बदल दिया, जो इतिहास में काले कारनामों में दर्ज है।
1. बीएसपी संगठन में क्या कुछ चल रहा है इस पर घोर दलित-विरोधी सपा अगर कोई टिप्पणी व चिन्ता नहीं करे तो बेहतर। इसके बदले सपा नेतृत्व को चुनाव में उतारे गए उनके अपने परिवार व उनके यादव समाज के प्रत्याशियों का क्या हाल है इसकी केवल चिन्ता करें क्योंकि उन सब का हाल बेहाल है।
— Mayawati (@Mayawati) May 8, 2024








